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बंसी को सीएम बनाने और बचाने में भजन-देवीलाल का हाथ
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लालों की रियल स्टोरी
प्रदेशके इतिहास में कुछ ऐसी घटनाएं हुईं हैं, जो नहीं होतीं तो शायद बंसीलाल कभी सीएम नहीं बनते और मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पिता रणबीर सिंह का सीएम बनने का सपना पूरा हो जाता।
पंडित भगवत दयाल शर्मा का राजनीतिक जीवन जल्द खत्म नहीं होता। ऐन वक्त पर भजनलाल का फाॅर्मूला नहीं चलता तो वे राजनीति के पीएचडी नहीं कहलाते और चौधरी देवीलाल को कांग्रेस नहीं छोड़नी पड़ती। भास्कर ने 1968 से 1977 तक की प्रदेश की राजनीति में हुए घटनाक्रम की वजहों को तलाशा तो चौकाने वाले तथ्य सामने आए। आगे चलकर इन्हीं घटनाओं ने ही तीनों लाल की राजनीति के मायनों को बदल कर रख दिया था।
बंसीलाल का मजाक सहन नहीं कर पाए देवीलाल |1972 में बंसीलाल फिर सीएम बने। तब देवीलाल खादी ग्राम उद्योग के चेयरमैन बने। एक दिन रोहतक में बंसीलाल ने मजाक में देवीलाल समर्थकों से कहा कि उनका चौधरी तो रेजी (खादी के कपड़े) बेचता है। यह बात देवीलाल को पता चली तो उन्होंने इसे अपनी तौहीन समझा और इस्तीफा दे दिया। इसके बाद देवीलाल ने कांग्रेस से भी विदा ले ली।
िडजाइन टीम : िवश्वजीत, धनेश मुंजाल, राहुल कुंुडू
मई 1968 मेंदूसरे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला। सीएम की घोषणा से एक दिन पहले इंदिरा गांधी को विदेश जाना पड़ा। उन्होंने जाते समय केंद्रीय गृह मंत्री कैथल से सांसद गुलजारीलाल नंदा को इशारा कर दिया कि रणबीर सिंह काे सीएम बनवाना। यह बात देवीलाल को पता चल गई। रणबीर सिंह और देवीलाल में बनती नहीं थी। देवीलाल को पता था कि बंसीलाल, नंदा के करीबी हैं। वे रात को ही भिवानी पहुंचे और बंसीलाल को जगाया। देवीलाल के कहने पर बंसीलाल दिल्ली में नंदा से मिले। नंदा ने उन्हें पंडित भगवत दयाल शर्मा के पास जाने की सलाह दी। बंसीलाल पंडितजी के घर पहुंचे और कहा, \\\"अगर रणबीर सिंह सीएम बन गए तो आपकी राजनीति खत्म हो जाएगी। मुझे सीएम बनवा दें। आपसे बाहर नहीं जा सकता।\\\' पंडितजी ने बंसीलाल के सामने शर्त रख दी कि दो माह बाद सत्ता उन्हें सौंप देंगे। बंसीलाल तैयार हो गए। इंदिरा गांधी की इच्छा से अनजान रणबीर सिंह ने भी ज्यादा विरोध नहीं किया। विदेश यात्रा से लौटीं इंदिरा गांधी को भी लगा जब विधायक ही ऐसा चाहते हैं तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। इस तरह बंसीलाल सीएम बने।
बंसीलाल के पलटी खा जाने से खफा पंडित