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गृह प्रवेश और लंच

6 वर्ष पहले
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पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपनी सरकारी कोठी में वैसे तो रविवार को गृह प्रवेश किया था। लेकिन गृह प्रवेश से पहले शनिवार को पत्रकारों को बुलाकर प्रेस कांफ्रेंस कर ली और उनका लंच भी कर दिया। यह लंच पत्रकार और नेताओं में चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर शनिवार के दिन पत्रकारों का लंच क्यों रखा गया। यह प्रेस कांफ्रेंस रविवार को गृह प्रवेश के बाद भी तो हो सकती थी। हुड्डा के ही करीबी रहे कुछ लोगों की टिप्पणी थी कि “शुभ काम” करने से पहले शनि और राहु-केतु समेत सभी ग्रहों को शांत जो करना होता है।

लंच की राजनीति और मतभेद

लंचकी बात से एक और किस्सा याद आया। अपने खट्टर काका और दाढ़ी वाले बाबा अनिल विज के “ग्रह” काफी दिनों से मेल नहीं खा रहे हैं। भले ही दोनों एक सरकार का हिस्सा हैं, लेकिन दूरियां बढ़ती जा रही हैं। इस दूरी को कम करने के लिए अपने खट्टर काका ने सूरजकुंड में सभी विधायकों और जिलाध्यक्षों का लंच रख दिया। लेकिन विज उनसे भी एक कदम आगे निकले और उन्होंने उसी दिन अपने शहर अंबाला में जनता दरबार लगा लिया। सत्ता के करीबियों की सलाह है कि लंच खिलाने के बजाय खट्टर काका को अंबाला में जाकर ग्रह शांत करवाने चाहिए।

ऐसा मंत्री देखा है कहीं

मुख्यमंत्रीऔर मंत्री तो हमने बहुत देखे हैं, लेकिन ऐसा मंत्री शायद ही हो, जिसके लिए पूरा विपक्ष एक जुट हो जाए और उनकी तारीफों के पुल बांधने लगे। लेकिन हरियाणा के खेल मंत्री अनिल विज ने सरकार के 100 दिन पूरे होने पर ट्वीट कर दिया कि कुछ लोग उन्हें काम करने के तरीके से रोकना चाहते हैं। बस फिर क्या था मौकापरस्त विपक्ष ने तुरंत अपनी रोटी सेंकी और इनेलो से लेकर कांग्रेस ने यह कहकर निंदा कर डाली कि अनुभवी मंत्री को काम करने का मौका दिया जाना चाहिए।

इनकी तो गई भैंस पानी में!

टाउनप्लानिंग से संबंधित एक महिला अधिकारी के बनते काम में खट्टर काका के एक करीबी अफसर ने ऐसी भांजी मारी कि पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। दरअसल महिला अधिकारी का टाउन प्लानिंग का चीफ बनना लगभग तय था कि बीच में राहू-केतु लग गया। ऐनवक्त पर उन्हीं के समकक्ष अफसर को एचएसआईआईडीसी से लाकर टाउन प्लानिंग का चीफ बना दिया। फैसले से महिला अधिकारी के साथ सीएमओ कई राजनीतिज्ञ चकित रह गए कि आखिर यह हुआ कैसे। पड़ताल में पता चला कि जिस अधिकारी को चीफ बनाया है, मौजूदा चीफ उन्हीं के रिश्तेदार थे। घर की बात घर में रही। लेकिन इस खेल में महिला अधिकारी की तो भैंस पानी में चली गई। -ओएसडी giriraj@dbcorp.in

खजाना और वेतन के लाले

प्रदेशकी भाजपा सरकार ने हालांकि सत्ता संभालते ही खजाना खाली होने का राग अलापना शुरू कर दिया था। लेकिन कर्मियों को यह उम्मीद कतई नहीं थी कि उनके वेतन के भी लाले पड़ सकते हैं। पब्लिसिटी सहित कई महकमों में लगे कांट्रेक्ट कर्मियों को वेतन मिले 3 माह हो गए। सूचना आयुक्तों तक के लिए बजट की कमी परेशानी बन रही है। यह अलग बात है कि इन कमिश्नरों को पिछली सरकार लगाकर गई थी, बजट की कमी की एक वजह यह भी हो सकती है।

ऐसा सुझाव, तौबा-तौबा

कांग्रेसकी मंथन मीटिंग में पिछली बार रोहतक जिले की एक कलाबाज एमएलए ने नेताओं को ऐसा सुझाव दे दिया कि वे सुनकर स्तब्ध रह गए। दरअसल इस एमएलए से पूछा तो गया था कि पार्टी को फिर से कैसे रिवाइव किया जाए। उन्होंने सुझाव दे दिया कि राहुल गांधी को काम करने का तरीका हमारे युवा सांसद से सीखना चाहिए। इतना सुनते ही सुझाव लेने वालों के तो जैसे हाथ-पांव फूल गए और एमएलए को कहा कि आपको मालूम है आप क्या बोल रहे हैं। सुना है अब इस एमएलए के सुझाव को ज्यों कि त्यों पार्टी हाईकमान को भेजने की तैयारी है।