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मानसिकरूप से बीमार युवती से दिल्ली की निर्भया जैसी दरिंदगी : 28 वर्षीय नेपाली युवती के साथ “दिल्ली की निर्भया’ जैसी दरिंदगी की गई। वह करीब तीन साल से मानसिक रूप से बीमार थी। रोहतक के चिन्योट कॉलोनी में किराए पर रहने वाली उसकी बड़ी बहन दो माह पहले उसे पीजीआई में इलाज कराने के लिए लाई थी। 1 फरवरी को वह लापता हो गई। परिजनों ने पीजीआई थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। इस बीच, 4 फरवरी (बुधवार) को उसकी नग्न लाश पास के गांव बहु अकबरपुर में मिली। 6 फरवरी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो पता चला कि युवती के साथ क्रूरता की हदें पार कर दी गईं। डॉक्टरों के मुताबिक युवती के साथ दुष्कर्म-कुकर्म के अलावा उसको शारीरिक चोट पहुंचाई गई। उसके निजी अंगों पर घाव के निशान थे। शरीर के अंदर सीमेंट चादर के टुकड़े, पत्थर और कंडोम निकले। हैवानों ने रॉड के प्रहार करके मल-मूत्र द्वार को एक कर दिया। प्रदेश भर में इस हैवानियत के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हुए। लोगों ने कैंडल मार्च निकाला। युवती को श्रद्धांजलि दी।
मांझीपार्टी...
आरजेडीके पप्पू यादव मांझी के समर्थन में गए हैं। कहा- दलितों को हमेशा वोट के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। मांझी की गलती क्या है? उन्हें क्यों हटाने की कोशिश की जा रही है?
सीएम बनाओ नहीं तो दिल्ली में परेड : नीतीश
12.00बजे : राज्यपालकेसरीनाथ त्रिपाठी कोलकाता से पटना पहुंचे।
1.45बजे : नीतीश130 विधायकों को लेकर राजभवन पहुंच गए।
2.37बजे : राज्यपालसे घंटेभर बात करके बाहर निकलते ही बोले-
‘हमनेराज्यपाल को हमें बुलाने के लिए 48 घंटे दिए हैं। अगर उन्होंने टालने की कोशिश की तो दिल्ली में राष्ट्रपति के सामने भी ऐसे ही परेड कराएंगे।’
3.00 बजे : मांझीअपने चार मंत्रियों को लेकर राजभवन पहुंचे।
3.45बजे : राज्यपालसे बातकर 45 मिनट बाद बाहर आकर बोले-
‘राज्यपालसे 23 फरवरी तक का वक्त मांगा है। बहुमत साबित करूंगा। पर फैसला सीक्रेट बैलट से होना चाहिए। कैबिनेट विस्तार की अनुमति भी मांगी है।’
7.00 बजे : राज्यपालने मांझी की कैबिनेट विस्तार की मांग ठुकरा दी। दिल्ली रवाना।
मोदी की ताकत से डर लगता है : त्यागी
जेडीयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा, नरेंद्र मोदी के पास मुख्यमंत्री बनाने और बिगाड़ने की असीमित ताकत है। वह राज्यपालों को प्रभावित कर सकते हैं। मोदी की शक्ल से नहीं, उनकी इसी ताकत से डर लगता है।
बहुमत का आंकड़ा 117, विकल्प तीन
सीन1 : संभवहै राज्यपाल मांझी को विश्वास मत साबित करने को कहें। मांझी के साथ भाजपा के 87 और जेडीयू के 7 विधायक हैं। आरजेडी के 3 और 5 निर्दलीयों का साथ मिल जाए तो भी 102 ही होते हैं। बहुमत से 15 दूर।
सीन2 : यदिमांझी विश्वास मत साबित नहीं कर पाए तो राज्यपाल नीतीश को बुलाएंगे। वह 130 विधायकों का समर्थन पत्र सौंप चुके हैं। यानी उनकी राह आसान है, लेकिन शर्त यही है कि मांझी अपना बहुमत साबित कर पाएं।
सीन3 :मांझी विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव कैबिनेट से पास करा चुके हैं। इसे राज्यपाल को भेज सकते हैं। पर इस प्रस्ताव के समय 27 मंत्री तो बैठक छोड़कर चले गए थे। इसलिए राज्यपाल इसे ठुकरा भी सकते हैं।