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सादा जीवन उच्च विचार की परिपाटी से दूर होना दुख का कारण: श्री हित

7 वर्ष पहले
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हमारेअंतरमन में सुख के सूत्र छिपे हुए हैं। माया के चक्कर में हम उसे भूलकर यंत्रवत जीवन जिए जा रहे हैं। यह कहानी बहुत दिन तक चलने वाली नहीं है। ऋषि परंपरा में ही परम शांति का खजाना पाया जा सकता है।

यह कहना है श्री हित अंबरीश का। वे ग्रीन रोड स्थित सोहम मंदिर में रविवार को दिव्य श्रीमद् भक्तमाल कथा समारोह में श्रद्धालआें को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सादा जीवन उच्च विचार की परिपाटी से दूर होते जाना ही आज के मानव के दुखी होने का कारण है। पहले सीमित संसाधनों के बीच हम सुख के कारण खोज लेते रहे, लेकिन आज समाज का ढांचा बदल गया है। दिखावे की जिंदगी जीने में होड़ मची है। सर्वशक्तिमान बनने के चक्कर हर पल परेशान हैं। इसके चलते हमारा स्वभाव जटिल होता जा रहा है। स्वभाव की जटिलता से छुटकारा संत ही दिला सकते हैं और संतों से भेंट सत्संग में ही होती है।

रोहतक. ग्रीनरोड स्थित सोहम मंदिर में आयोजित श्रीमद‌् भागवत कथा के दौरान प्रवचन सुनते श्रद्धालु। (इंसेट) प्रवचन करते श्री हित अम्बरीष।