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वैज्ञानिक सोच को धरातल से जोड़ना होगा : डॉ. आहूजा
वैज्ञानिक सोच को धरातल से जोड़ना होगा : डॉ. आहूजा
रोहतक | व्यक्तिको अपनी सोच एवं कार्यक्षमता के दायरे को सदैव बढ़ाते रहना चाहिए। इन दोनों में संकुचन आने का मतलब व्यक्ति का मूढ़ता प्राप्त करना हो सकता है। ये कहना है बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. मारकंडेय आहूजा का। वे मंगलवार को इंजीनियरिंग विभाग में आयोजित एक व्याख्यान में अपने विचार रख रहे थे।उन्होंने कहा कि आज जिस के पास जो व्यवसाय है यदि हम उसी को पूर्णता से देखना शुरू करें तो हमें उसकी आवश्यकता और उसके उपयोग का अंतर आसानी से महसूस हो जाएगा। प्रत्येक व्यवसाय एक विशेष गरिमा रखता है और प्रत्येक व्यक्ति किसी ना किसी रूप में अपने या दूसरे के व्यवसाय से जुड़ा रहता है। इस अवसर पर डाॅ. विनोद, डाॅ. कमलेश मलिक, डाॅ. अजय , डाॅ. मीनाक्षी, डाॅ. देवेन्द्र सिंह, डाॅ. प्रदीप, डाॅ. एसपी शर्मा, डाॅ. शुभम , डाॅ. रामफूल, डीन छात्र कल्याण अमन उपस्थित रहे।