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भक्ति के लिए इंसान होना जरूरी : शर्मा बंधु
आर्यसमाजी मित्रसेन आर्य की 83वीं जयंती पर आयोजित की भजन संध्या, हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने भी किया दीप प्रज्ज्वलन
भास्करन्यूज | रोहतक
भक्तिजीवन का दर्शन है। औपचारिक के भरोसे भक्ति नहीं की जा सकती। इसके लिए मन से परमात्मा में लीन होना पड़ता है। हालांकि भक्ति हरेक को मिलती है, लेकिन आदमी का भक्ति के लिए इंसान होना भी जरूरी है। बिना भक्ति के आदमी इंसान नहीं बन सकता। इसमें काफी गहरा रहस्य छिपा हुआ है। ये बात रविवार को आर्य समाजी स्व. मित्रसेन आर्य की जयंती की भजन संध्या में बतौर भजन गायक पहुंचे शर्मा बंधुओं में से गोपाल शर्मा ने कही। पीजीआईएमएस के नए सभागार में भजन संध्या का आयोजन किया गया।
शर्मा बंधुओं गोपाल शर्मा, सुखदेव शर्मा, कौशलेंद्र शर्मा राघवेंद्र शर्मा ने जब भजन शुरू किया तो पूरा सभागार भक्तिमय हो गया। भजन गाते हुए, यूं पत्थर पर जाकर दो फूल चढ़ा देना, पूजा इसका नाम है। मन के अंधकार को हटाकर दीप जला देना भक्ति इसका नाम है। इस गीत पर हर मन सुरमयी होकर उनके साथ भजन में सुर मिलाने लगा। कार्यक्रम में डॉ. सीताराम व्यास ने उन्हें अध्यात्म, दानवीरता शूर वीरता कर अनूठा मिश्रण बताते हुए उनके जीवन पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में दीप प्रज्ज्वलन हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, सांसद प्रवेश वर्मा, बाबा लक्ष्मणपुरी गो कर्ण डेरे के संचालक बाबा कपिलपुरी महाराज, एमडीयू के कुलपति एचएस चहल, समाजसेवी मनमोहन गोयल, कैप्टन रूद्रसेन स्वास्थ्य विश्वविद्यालय कार्यवाहक कुलपति डॉ. वीके जैन ने किया। कार्यक्रम के अंत में कैप्टन रूद्रसेन आर्य ने आए हुए सभी अतिथियों का धन्यवाद किया। कार्यक्रम में निदेशक डॉ. सीएस ढुल, पूर्व वीसी डॉ. एसएस सांगवान, कुलसचिव डॉ. सरला हुड्डा, एकता सिंधु, डॉ. कुलबीर छिक्कारा, संपूर्ण बागड़ी, धर्मपाल मलिक, कपिल नागपाल समेत अनेक लोग उपस्थित रहे।
भजनों से दी श्रद्धांजलि
आर्यसमाज की समाजसेवी स्वर्गीय चौ. मित्रसेन की 83वीं जयंती पर पीजीआई के सभागार में परम मित्र मानव निर्माण संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उज्जैन से आए विख्यात भजन गायक शर्मा बंधु ने अपने भजनों से उन्हें श्रद्धांजलि दी। दिल्ली के सांसद प्रवेश वर्मा ने कहा कि चौ. मित्रसेन वैदिक पुरुष थे तथा उन्होंने संयम, पुरुषार्थ करुणा के साथ अपना जीवन जिया। इस अवसर पर आर्य विद्व