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योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अधर्म का नहीं दिया साथ

7 वर्ष पहले
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योगेश्वरश्रीकृष्ण ने अपने वंश का सर्वनाश होने दिया, लेकिन अधर्म का साथ नहीं दिया। हम मनुष्यों के लिए यही सबक है। आज अपनी संतान को बचाने के लिए लोग समाज का विनाश होते देख रहे हैं, जिसके चलते वातावरण दूषित हुआ और मातृ शक्ति का चौखट से बाहर निकलना भी दूभर हो गया। सांस्कृतिक संक्रमण की दुर्गति से समाज को निकालने के लिए धर्म की मौलिकता समझकर उसे जीवन में उतरना होगा।

यह कहना है आध्यात्मिक गुरु एस्ट्रोलॉजिस्ट पवन सिन्हा का। वे एमडीयू के टैगोर ऑडिटोरियम में चल रहे श्रीकृष्ण रहस्य सत्संग समारोह के दूसरे दिन रविवार को उपस्थित जन समुदाय को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पूरा युग करवट ले रहा है। परिवर्तन की इस बेला में कदम से कदम मिलाकर चलने की जरूरत है। हम धर्म की जिस चादर को आेढ़कर चलते हैं, उसे विस्तार देना है।

संतानोंकी जिज्ञासा शांत कर करें मार्गदर्शन

युवापीढ़ी के मस्तिष्क में विचारों की आंधी है। वह काबिल और समझने को बेताब हैं। अपनी संतानों की जिज्ञासा हमें शांत करते हुए उनका मार्गदर्शन करना होगा। खाली होते ही दूसरा आवरण चढ़ जाता है। यही प्रकृति का नियम है, जो धर्म विचार दोनों पर लागू होता है। यदि बच्चों को भारतीय शास्त्र की सही जानकारी मिली तो वैश्वीकरण के इस दौर में सांस्कृतिक साम्राज्यवाद के शिकार हो जाएंगे, क्योंकि जीवन संस्कृति के बिना नहीं चल सकता है। श्रीकृष्ण ने संघर्ष, संकल्प और अनवरत अभ्यास विनम्रता के बल पर पुरुषार्थ और शक्तियां अर्जित की। उन्होंने कभी कोई चमत्कार नहीं किया। ढाई हजार साल में लीला के नाम पर अनावश्यक चीजें कृष्ण के नाम के साथ जोड़ दी गई।

रोहतक. एमडीयूके टैगोर ऑडिटोरियम में आयोजित श्री कृष्ण रहस्य सत्संग में प्रवचन सुनते शहरवासी इनसेट में प्रवचन करते आध्यात्मिक गुरु एस्ट्रोलॉजिस्ट पवन सिन्हा।