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सुर का जिसको ज्ञान नहीं, वो तो कोई इंसान नहीं

7 वर्ष पहले
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जगदीशकॉलोनी स्थित श्री प्रभुतानंद आश्रम में चल रहे 45 वें वार्षिक महायज्ञ एवं संत सम्मेलन के तीसरे दिन आध्यात्मिक गुरुओं ने भगवान से ज्यादा उनके भक्तों की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि यूं तो संसार के संचालनकर्ता भगवान हैं, लेकिन अपना यश और कीर्ति बनाए रखने के लिए उन्हें भी अपने दासों पर निर्भर रहना पड़ता है।

स्वामी प्रभुतानंद धर्मार्थ सोसायटी के तत्वाधान में चल रहे धार्मिक कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय मानस व्यास पंडित रामचंद्र पांडेय ने कहा कि राम से बड़े राम के दास है। भक्त हनुमान का उदाहरण देते हुए व्यास जी ने कहा कि भगवान राम सर्वव्यापी हैं, लेकिन उन्हें अपने काल में भक्त हनुमान का सहारा लेना पड़ा। श्री भुआ दित्ता जी महाराज ने प्रवचन में सुर का जिसको ज्ञान नहीं, वो तो कोई इंसान नहीं\\\' के जरिये इंसान की प्रकृति समझाया। हमें परखने का कोई तरीका नहीं, कोई वरना दुश्मन किसी का नहीं से समझाते हुए महाराज ने कहा कि हर व्यक्ति के अंदर भगवान विराजमान हैं, लेकिन परख होने के कारण इंसान एक दूसरे से लड़कर बेवजह शक्ति क्षीण कर रहे हैं। जब इंसान को अपने अंदर परमात्मा के अंश का बोध हो जाएगा, उस वक्त वह सभी सांसारिक दुखों से मुक्ति पा लेगा। कार्यक्रम में स्वामी प्रभुतानंद धर्मार्थ सोसायटी के प्रधान केएल मिगलानी, सरपरस्त रामनाथ सचदेवा, उपप्रधान एवं कोषाध्‍यक्ष अशोक कुमार धमीजा, सचिव जगदीश चंद्र परूथी, वीरेंद्र दुआ, मुलखराज आहूजा, मुरारीलाल छाबड़ा, मुरारीलाल छाबड़ा, रामप्रकाश बत्तरा, वीरेंद्र दुआ आदि मौजूद रहे।

रोहतक. जगदीशकॉलोनी स्थित प्रभुतानन्द आश्रम में आयोजित वार्षिक महायज्ञ एवं सन्त सम्मेलन में प्रवचन सुनते श्रद्धालु