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कुर्सी नसीब नहीं, फर्श पर बैठने को मजबूर
नगरनिगम प्रशासन ने मानसरोवर पार्क से माडल टाउन में लाइब्रेरी तो शिफ्ट कर दी, लेकिन एक सप्ताह बाद भी कुर्सी फर्नीचर तक की व्यवस्था नहीं की। इस कारण पाठकों को फर्श पर बैठकर पढ़ना पड़ रहा है। इस मामले के लिए जिम्मेदार अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
चार साल पहले नगर निगम प्रशासन ने मानसरोवर पार्क में लाइब्रेरी के लिए भवन का निर्माण करवाया। बाद में विधायक बीबी बतरा ने इस बिल्डिंग को सीनियर सिटीजन की मांग पर उन्हें सौंप दिया। छह माह बाद भी जब भवन नगर निगम प्रशासन से खाली नहीं किया तो चुनाव आचार संहिता से ठीक पहले निगम प्रशासन पर दबाव बढ़ने लगा। इसके चलते लाइब्रेरी माडल टाउन स्थित कम्यूनिटी सेंटर में शिफ्ट कर दी गई। ट्रैक्टर ट्रालियों में भरकर लाइब्रेरी से हजारों किताबें भेज दी गईं, लेकिन पाठकों के बैठने के लिए चार मेज, 27 कुर्सी, कूलर दूसरा सामान नहीं भेजा गया। क्योंकि कम्यूनिटी सेंटर के जिस कमरे में लाइब्रेरी बनाई गई है, वहां जगह कम है।
अधिकारीबोला, सिर पर बिठाऊं
लाइब्रेरीस्टाफ का कहना है कि जब परेशानी के बारे में संबंधित अधिकारी से फोन किया तो उसने जवाब दिया कि उसे आला अधिकारियों ने लाइब्रेरी शिफ्ट कराने की जिम्मेदारी दी थी। कुर्सी रखने की जगह नहीं है तो क्या वे पाठकों को अपने सिर पर बिठाऊं। पाठकों का कहना है कि संबंधित अधिकारी का यह रवैया बेहद गैरजिम्मेदाराना है। वे डीसी एवं निगम प्रशासन से शिकायत करेंगे।
यहां तो अस्थाई व्यवस्था
निगमके अधिकारी ने बताया कि कम्यूनिटी सेंटर में तो अस्थाई व्यवस्था है। बाल भवन के पास लाइब्रेरी के लिए भवन का निर्माण तेजी से चल रहा है। ऐसे में कुछ समय की ही परेशानी है।
चंद कदम दूर पहले से ही पब्लिक लाइब्रेरी
नगरनिगम प्रशासन ने माडल टाउन के कम्यूनिटी सेंटर के एक कमरे में लाइब्रेरी शिफ्ट की है, जहां चंद कदम दूर डबल पार्क के अंदर पब्लिक लाइब्रेरी है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब माडल टाउन में पहले से लाइब्रेरी थी तो उसे वहां क्यों शिफ्ट किया गया। जहां शिफ्ट किया गया है उस कमरे में सामान नहीं रहा।