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सूरजभान की रचनाएं साहित्य की श्रेष्ठ कृति

7 वर्ष पहले
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रोहतक | भक्तभगवान का स्मरण करते हुए स्वयं भगवत स्वरूप हो जाता है। ये बात एमडीयू हिंदी विभाग के सेवानिवृत प्रोफेसर हरिशचंद्र वर्मा ने ट्रस्ट श्री डेरा महाराज दलेदास (भीष्म जी) परिसर में बुधवार को महंथ डॉ. सूरज भान द्वारा रचित नाम महिमा एवं वंदन स्तोत्र के लोकार्पण और विवेचन समारोह में कही। उन्होंने कहा कि डॉ. सूरज भान की रचनाएं संत साहित्य की श्रेष्ठ कृतियां हैं। इस अवसर पर संत जैतराम की वाणी ग्रंथ साहिब के दूसरे संस्करण का लोकार्पण किया गया। इसके संपादक डॉ. हनुमंत राम नीरव हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता वाजिब साहब ने की। उन्होंने महंथ जी को सत्संग गंगा शीर्षक से प्रकाशित 12 पुस्तकें भेंट की। कार्यक्रम में सूबे सिंह, पूर्व सरपंच माड़ौदी रामधन, रमेश, सत्यवान, डॉ. कृष्णा महलान आदि उपस्थित रहे।