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रसायनरहित खेती का स्वर्णिम भविष्य: कपिल भाई

7 वर्ष पहले
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गोबर की सही तरीके से तैयार खाद का ही करें प्रयोग

भास्करन्यूज। रोहतक

गुजरातके कृषि वैज्ञानिक और भारत सजीव कृषक समाज के राष्ट्रीय सचिव कपिल भाई ने कहा कि बिना रसायनों की खेती का ही भविष्य स्वर्णिम है।

भारत के बाकी हिस्सों में बिना रसायनों की कुदरती खेती की शुरुआत बरसों पहले हो चुकी है। हरित क्रांति के गढ़ हरियाणा-पंजाब में भी इस नई राह पर चलने वाले किसानों की तादात बढ़ रही है। वे कुदरती खेती अभियान की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।

कपिल ने बताया कि अगर आप गोबर और पशु मूत्र का सही तरीके से प्रयोग करने लगें तो खरपतवार की समस्या रहेगी और कम पैदावार होगी। दूसरा अगर बीज बिखेरने के स्थान पर पंक्ति में या बैड पर बोये जाएं तो यंत्रों से खरपतवार नियंत्रण आसानी से हो सकता है।

गोबर की सही तरीके से तैयार खाद के प्रयोग के साथ-साथ अगर गेहूं के साथ ही दलहनी फसलें भी ली जाएं तो पैदावार कम नहीं होगी। कुदरती खेती अभियान के सलाहकार प्रोफेसर राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि देर शाम तक चली बैठक में प्रस्ताव पास कर जहर रहित खेती को बढ़ावा देने की मांग की गई। 55 गांवों के किसानों के साथ कई पूर्व अधिकारी शामिल हुए। बैठक में निर्णय लिया गया कि कुदरती अभियान को हरियाणा में गति देने के लिए सक्रिय किसानों की कमेटी नियमित रूप से मिले और इस अभियान का मार्गदर्शन करें। बेलरखां के किसान उदयभान को इस अभियान का संयोजक मनोनीत किया गया।