मन को भटकाव से रोकने में सत्संग सहायक
श्रीहितअंबरीश जी ने कहा कि भक्तों के चरित्र श्रवण से जीव को मानव तन पाने का बोध हाेता है। उसे सही दिशा मिलती है। साथ ही सांसारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए पारलौकिक सुधारने का भरपूर मौका मिलता है। वे बुधवार को सोहम मंदिर में पांच दिवसीय दिव्य श्रीमद् भक्तमाल कथा के प्रथम दिन श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।
उन्हाेंने कहा कि भक्त भगवान का सबसे प्यारा होता है। भक्त बनकर ही भक्तों का चरित्र कहा और सुना जा सकता है। भक्त का चरित्र अनुकरणीय होता है। वे मानव जीवन को सीख देने के लिए आते हैं। रसिक अनन्य भक्त हरिराम व्यास के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि हरिराम परम विद्वान राजगुरु थे। उनके जीवन में अचानक परिवर्तन तब आया जब वे वृंदावन आए और हित हरिवंश महाप्रभु का दर्शन किया। प्रभु की कृपा का प्रसाद मिलते ही उनके मन से विद्वान होने का अहंकार खत्म हो गया। वे सरल हृदय के उदार संत बन गए। इसके बाद उन्होंने वृंदावन में रहकर आजीवन संतों की सेवा की।
अंबरीश जी ने उपस्थित लोगों का आह्वान किया कि वे मन को भटकाव से रोकने के लिए सत्संग में नियमित भागीदारी करें। इसका लाभ उन्हें व्यावहारिक जीवन में भी दिखाई देगा। संतों के वचनों पर अमल करके जीवन में क्रांतिकारी परिर्वतन लाया जा सकता है। ऐसे बहुतेरे उदाहरण हैं, जब किसी संत के संपर्क में आने के बाद व्यक्ति का पूरा जीवन बदल गया और वह सबके लिए वंदनीय हो गया। शाम को 4 बजे से 7 के बीच हो रही कथा में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भागीदारी की।
श्रीहित अंबरीश।
भक्तों के कल्याण के लिए वामन अवतार लिया
रोहतक| भगवानको सर्वाधिक प्रिय भक्त होता है। वे किसी हाल में भी भक्त का दुख नहीं देख पाते। जो उनकी शरण में जाता है, सारा सुख प्रदान करने के बाद उसे अपने परम धाम का अधिकारी बना देते हैं। यह उद्गार बाल व्यास केशव कृष्ण के हैं। वे बैंक्वेट हाल में चल रही भागवत कथा के दौरान बुधवार को श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। भगवान के वामन अवतार की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भक्त का हित साधने के लिए ही राजा बलि के साथ छल की लीला करनी पड़ी। भिक्षा में समूची पृथ्वी का दान लेकर देवताओं के संकट मोचक बन गए। ध्रुव, प्रह्लाद का चरित्र और उन पर भगवान का विशेष अनुग्रह भक्ति से मिलने प्रभु के अनुग्रह का अनूठा उदाहरण है। सौतेली मां से तिरस्कृत ध्रुव को