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रसायनों का प्रयोग कैंसर को फैलाने में अधिक जिम्मेदार
अबप्रोटोन थैरेपी से कैंसर का इलाज किया जाएगा। इसके लिए काफी हद तक शोध हो चुके हैं, लेकिन इलाज महंगा होने के चलते अभी तक इसे देश में अपनाया नहीं जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जितनी राशि में 30 लिनियर एक्सिलिरेशन मशीन खरीदी जा सकती है उतने में प्रोटोन थैरेपी की एक ही मशीन आती है। वहीं बदलता लाइफ स्टाइल और रसायनों का प्रयोग कैंसर को फैलाने में अधिक जिम्मेदार बना हुआ है। ये मंथन रविवार को पंडित बीडी शर्मा हेल्थ विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय कैंसर संस्थान द्वारा आयोजित की जा रही दो दिवसीय नॉर्थ जोन एआरओआईकोन 2014 कांफ्रेंस में किया गया।
कांफ्रेंस का दूसरे दिन रविवार को समापन हो गया। पद्म श्री डॉ. पीके जुल्का ने रोल ऑफ एमटोर इन आंकोलोजी विषय पर अपने अनुभव सांझा किए, इसके अलावा पोस्टर प्रस्तुति, ओरल पेपर प्रस्तुति प्रश्नोतरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें करीब छह मेडिकल कॉलेजों ने हिस्सा लिया। कांफ्रेंस में करीब 250 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक कौशल ने बताया कि रविवार को डॉ. आरबी ने प्रोटोन थैरेपी तकनीक द्वारा कैंसर के इलाज के बारे मे जागरूक किया। डॉ. श्याम अग्रवाल अमीत अग्रवाल ने एंडोक्राईन मैनेजमेंट ऑफ ब्रेस्ट कैंसर के बारे मे बताया। डॉ. विवेक कौशल ने कहा कि 90 से 95 प्रतिशत कैंसर की बीमारी का मुख्य कारण वातावरण, जीवन शैली एवं आर्थिक व्यवहारिक व्यवहार का होता है। कैंसर का जोखिम धूम्रपान या तंबाकू का सेवन ना करना, बाहर जाते समय अपनी त्वचा को धूप की किरणों से बचाना, शारीरिक रूप से सक्रिय रहना, कीटनाशक रहित फल सब्जियों और अधिक रेशे वाले अधिक आहार का ज्यादा सेवन करना इत्यादि को लागू करने से कम हो सकता है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अशोक चौहान ने कांफ्रेंस के दौरान छाती के कैंसर सर्वीकस के कैंसर के बारे मे आमजन के लिए संदेश दिया। कांफ्रेंस के सचिव डॉ. राजीव अत्री ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में पोस्टर प्रतियोगिता के दोनों इनामों पर पीजीआई ने कब्जा किया जिसमें प्रथम पुरस्कार डॉ. गरिमा ने वहीं द्वितीय डॉ. सुलभा ने जीता। ओरल पेपर प्रस्तुति मे शिमला मेडिकल कालेज का वर्चस्व रहा, जिसमे प्रथम पुरस्कार डॉ. शालिनी और द्वितीय पुरस्कार डॉ. दिव्या गुप्ता को मिला। डॉ. वरुण अरोड़ा को शनिवार रात हुई सांस्कृतिक संध्या के लिए विशेष रुप से सम्मानित किया गया। इस अवसर