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वेतनभोगी शिक्षकों ने उठाई आवाज, 11 साल में नहीं बढ़ा वेतन, भत्ता भी छीना
नर्सिंगछात्रों द्वारा स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग के बाद अब शिक्षकों द्वारा वेतन बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया गया। राज्य के एकमात्र सरकारी नर्सिंग कॉलेज में पिछले 11 साल से शिक्षकों के वेतन में वृद्धि नहीं हुई। इसके अलावा सरकार की ओर से मिलने वाला भत्ता भी डेढ़ साल पहले छीन लिया गया। खास बात यह है कि शिक्षकों की मांग को लेकर विधानसभा में प्रस्ताव भी पारित हुआ।
बावजूद इसके अभी तक पीजीआई के नर्सिंग शिक्षकों का वेतन बढ़ा और ही भत्ता मिला। इन्हीं के चलते एक बार फिर नर्सिंग कॉलेज टीचिंग स्टॉफ वेलफेयर एसोसिएशन ने वेतन बढ़ोत्तरी का मुद्दा उठाया है। संगठन की अध्यक्ष कलावती राना के मुताबिक मार्च 2013 से शिक्षकों को मिलने वाला भत्ता भी पीजीआई प्रबंधन ने निरस्त कर दिया। प्रबंधन ये कहते हुए भत्ता देने से इंकार कर दिया कि ऊपर सेंशन होगा, तो इकट्ठा दे देंगे। कलावती राना ने कहा कि जब पीजीआई के अन्य विभागों में कार्यरत लेक्चरर डॉक्टरों को वेतन भत्ता ज्यादा मिल रहा है, तो फिर नर्सिंग शिक्षकों के साथ अन्याय क्यों किया जा रहा है?
प्रबंधनपर लगाए आरोप
नर्सिंगशिक्षकों ने प्रबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वेतन बढ़ाना सरकार के हाथ में है, लेकिन भत्ता देने का अधिकार प्रबंधन को है। बिना किसी वजह के शिक्षकों को डेढ़ साल से भत्ता नहीं मिल रहा है। शिक्षकों का आरोप है कि प्रबंधन जानबूझकर शिक्षकों के साथ खिलवाड़ कर रहा है। शिक्षकों का कहना है कि जब एम्स चंडीगढ़ पीजीआई के नर्सिंग शिक्षकों को वेतन भत्ता दोनों ज्यादा मिलते हैं, तो रोहतक पीजीआई के शिक्षकों को भी उनका मेहनताना ज्यादा मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्रीने रोकी फाइल
कलावतीराना ने बताया कि पिछली सरकार में पीजीआई प्रबंधन ने वेतन बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव भेजा था। इसको संज्ञान में लेते हुए तत्कालीन सरकार ने विधानसभा में पेश कर पारित भी कराया, लेकिन मुख्यमंत्री की मेज पर आने के बाद फाइल रोक दी गई। ये फाइल आज भी मंत्रालय में पड़ी-पड़ी धूल फांक रही है। नियमों का हवाला देते हुए कलावती ने बताया कि वर्तमान में कॉलेज में 30 शिक्षक कार्यरत हैं, लेकिन अफसोस इस बात का है कि शिक्षकों के वेतन का जिक्र कॉलेज स्थापना अधिनियम में नहीं है।