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डंपिंग ग्राउंड में बनी चारदीवारी

7 वर्ष पहले
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पीजीआईमें डंपिंग ग्राउंड की सफाई आखिरकार प्रबंधन ने करा ही दी। ग्लूकोज यूनिट विभाग के नीचे खाली मैदान में पड़ी हजारों दवाइयों की बोतलों अन्य जैविक कचरे को हटा लिया गया।

साथ ही ग्राउंड के चारों ओर बाउंड्री वॉल भी खड़ी कर दी गई है। इसके लिए प्रबंधन की ओर से बकायदा लाख रुपए का टेंडर भी निकाला गया। अधिकारियों का कहना है कि कचरा साफ कराने के लिए हर साल टेंडर निकाला जाता है, लेकिन इस बार टेंडर निकालने में देरी हो गई। जिसके चलते कचरे का ढेर बढ़ गया। पीजीआई में सफाई अभियान के दौरान छठवें दिन 7 नवंबर को सफाई के बीच जैविक कचरे का ढेर मिलने का मामला उजागर हुआ। अगले ही दिन प्रबंधन के बैठक बुला ली। इसमें कचरे के ढेर का मामला प्रमुखता से उठाया गया। निदेशक डॉ. चांद सिंह ढुल ने संबंधित विभाग को आदेश देते हुए डीएमएस डॉ. रविंद्र साहू को टेंडर संबंधी समस्या दूर करने के निर्देश दिए और कचरा उठाने का टेंडर दिया गया।

कचराप्रबंधन कमजोर

पीजीआईसे हर रोज निकलने वाला सैकडों टन जैविक कचरे का प्रबंधन लाख कोशिशों के बावजूद कमजोर है। अस्पताल परिसर में खाली पड़े कई स्थानों पर जैविक कचरा थैली में बंद दिखाई देता है। साथ ही वार्डों के पीछे भी जैविक कचरा साफ दिखता है। आपातकालीन विभाग के बाहर नो पार्किंग क्षेत्र में रस्सी की जगह मरीजों को बांधी जाने वाली पट्टियां लगी हुई हैं। वहीं परिसर में अंदर एक्सरे कक्ष से पहले रखे कचरे के डिब्बे भी अस्त-व्यस्त हैं। खास बात यह है कि अस्पताल के सभी वार्डों में कचरा एकत्रित करने के लिए अलग-अलग कलर के डिब्बे रखे हैं।

रोहतक. पीजीआईमें ग्लूकोज यूनिट विभाग के नीचे बना डंपिंग ग्राउंड। यहां चारदीवारी से कवर कर दिया गया है।