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बिना रेजिडेंट डॉक्टरों के पंगु है पीजीआई

7 वर्ष पहले
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पीजीआईएमएसमें अगर रेजिडेंट डॉक्टर हो तो यहां पर स्वास्थ्य सेवाएं चलाई ही नहीं जा सकती। भले ही हड़ताल खुल गई है, लेकिन इससे व्यवस्था की भी पोल खुल गई है। हर बार दावा किया जाता है कि प्रदेश के एकमात्र पीजीआईएमएस को स्वास्थ्य सेवाओं में नंबर वन बना दिया गया है। हालात ये हैं कि यहां पर पीजीआईएमएस के लिए अलग से डॉक्टर तैनात ही नहीं किए गए हैं। मात्र सीनियर प्रोफेसर, कंसल्टेंट और रेजिडेंट डॉक्टरों के सहारे ही सेवाएं चल रही है, जिनका काम पढऩा और पढ़ाना है। इसके अलावा यहां 36 एचसीएमएस डॉक्टर ही है।

स्पष्ट कहा जाए तो पंडित बीडी शर्मा हेल्थ विवि में पढ़ाई कर रहे रेजिडेंट डॉक्टर ही स्वास्थ्य सेवाओं को चला रहे हैं। यही कारण है कि मात्र 400 छात्रों के सहारे चल रही इन सेवाओं को चलाया जा रहा है। जोकि मनमर्जी से चलती हैं और कभी भी पंगु बना दी जाती है। यहां से सेवानिवृत हो चुके डॉक्टर भी इस बात को स्वीकारते हैं और कहते हैं कि कभी भी प्रबंधन की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़े कदम उठाए हीं नहीं गए हैं।

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रेजिडेंट डॉक्टर सुबह 9 बजे से ओपीडी संभाल लेंगे। आपातकालीन वार्ड के गेट पर सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे। सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। -डॉ. सीएस ढुल, निदेशक,पीजीआई।

डॉक्टरों की हिंदी खराब

रेजिडेंटडॉक्टरों ने गुरुवार को पार्क में ओपीडी चलाने के लिए पोस्टर तैयार किए। इनमें उनकी हिंदी भी खराब नजर आई। डॉक्टरों ने ओपीडी की जगह ओपिडि शब्द लिखे। उनसे पूछा तो बोले, हमारा हिंदी से वास्ता कम पड़ता है।

रोहतक. डॉक्टरोंकी हिन्दी का क्या कहना, ओपीडी को लिख दिया ओपिडि।