समझदार पहल, देर से ही सही
सात दिन के बाद शायद अब इन कराहती जिंदगियों को मिले राहत
रोहतक | रेजीडेंटडॉक्टरों की हड़ताल खत्म होने की खबर से गुरुवार की शाम पीजीआई में भर्ती मरीजों ने जहां राहत की सांस ली, वहीं परिजनों ने डॉक्टराें से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। समय पर दवाएं मिल पाने से जिन मरीजों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है, उनको सबसे पहले इलाज की जरूरत है। विभिन्न वार्डों में मिले ऐसे ही कुछ मरीजों की हालत इस प्रकार है।
दर्दकी दवा से चला रहे काम : कुशीनगरगोरखपुर निवासी रूदल 11 दिन से पीजीआई में भर्ती है। उसके दाेनों पैर जवाब दे चुके हैं। बिना किसी सहारे के उठ नहीं पाता है। पेट में बेहिसाब सूजन बढ़ती जा रही है। तीन दिन से एक निवाला गले के नीचे नहीं उतरा। प्यास के मारे बुरा हाल है। इमरजेंसी 6 नंबर रूम में बेड पर पड़ा रूदल बताते हैं कि दर्द की दवा देकर काम चलाया जा रहा है। 4 दिन से डॉक्टर नहीं आए हैं। कराहते हुए रात बीत रही है।
डॉक्टरनहीं आए तो लौट जाएगा घर
वार्डनंबर 12 में भर्ती विनोद 21 दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हाे गया था। 9 दिन से पीजीआई में भर्ती है। 4 दिन पहले बांए पैर में प्लास्टर लगाया जाना था, लेकिन डॉक्टर के नहीं आने से मामला जस का तस पड़ा हुआ है। पैर की टूटी हुई हड्डियों में रात को दर्द होने से नींद नहीं आती है।
दवामिलने से रिकवरी ठप : बलियाणारोहतक निवासी विनोद को 11 दिन पहले गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था। जांच में पता चला कि उसकी आंत फट गई है। तुरंत आपरेशन किया गया। खून भी चढ़ाया गया। सब कुछ ठीक चल रहा था कि रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल हो गई। समय से दवा देखभाल होने से घाव की रिकवरी ठप है। तीन दिन से तकलीफ बढ़ गई है। पैसे भी नहीं हैं कि बाहर से दवाएं मंगाई जा सकें।
घबराहटमें फूलने लगता है दम : करनालके कुंजपुरा निवासी खलील 35 दिहाड़ी मजदूर है। अनाज का बोरा ऊपर गिर जाने से गर्दन में गुम चोट है। एक पखवारे से पीजीआई में भर्ती है। बेटे आसिफ ने बताया कि इमरजेंसी में जाकर दिन में कई बार दवा देने की बात करने के बावजूद कोई देखभाल नहीं हो रही है। घबराहट में खलील का दम फूलने लगता है।
रोहतक . पीजीआईमें उपचाराधीन मरीज डॉक्टरों का इंतजार करते हुए
हस्तक्षेप
भास्कर
शुक्र है कि जूनियर डॉक्टर काम पर लौट आए। सात दिन और तेरह मौतों को अब भूल जाना चाहिए। हमें। पीजीआई