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गीता के दसवें अध्याय के बाद का अर्जुन बनो : पवन
रोहतक|श्रीमद्भागवत गीतामें अर्जुन के दो रूपों का दर्शन होता है। पहले दस अध्याय के अर्जुन और दूसरे ग्यारहवें से लेकर 18वें अध्याय के अर्जुन। यदि व्यक्ति जीवन में हार स्वीकार करेगा तो वह पहले वाला अर्जुन बन जाएगा, जबकि हालात से समझौता करने की बजाए संघर्ष की राह चुनने वाला पुरुषार्थी अर्जुन बन जाएगा। यह कहना है आध्यात्मिक गुरु पवन सिन्हा का। वे शनिवार को एमडीयू के टैगोर आडीटोरियम में आयोजित दो दिवसीय श्रीकृष्ण रहस्य सत्संग के प्रथम दिन भक्तों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बचपन से ही महापुरुषों की जीवनियों को सुनने चरित्र मजबूत होता है और सोचने समझने के ढंग बदल जाते हैं। आज कपोल कप्लित कहानियां गढ़ी जा रही हैं। बच्चों को दिया जा रहा यह संस्कार दुखों का कारण बन रहा है। उन्हाेंने कहा कि अनुशासन और नैतिकता भरा जीवन ही सच्चे अर्थों में धर्म है। चमत्कार की अपेक्षा करने वालों को भगवान के दर्शन नहीं होते हैं। शास्त्र सम्मत बात यह है कि जो प्रतिदिन भगवत स्मरण में लगा रहेगा। जीवन में घटित होने वाले हर प्रसंगों को प्रभु का प्रसाद मानकर कर्म पथ पर चलता रहेगा। वह आध्यात्मिक उन्नति के शिखर पर होगा।
पवन िसन्हा
एमडीयू के टैगोर ऑडिटोरियम में आयोजित श्री कृष्ण रहस्य सत्संग में प्रवचन सुनते शहरवासी