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मानवाधिकार है मूलभूत अधिकार कोई नहीं कर सकता हनन

7 वर्ष पहले
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विश्वमानवाधिकार दिवस पर जिला न्यायालय परिसर में प्रदर्शनी का शनिवार को आयोजन हुआ। इसका शुभारंभ जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता ने किया।

ये आयोजन एमडीयू के पत्रकारिता विभाग के सहयोग से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा किया गया। विभाग की प्रोफेसर सुमेधा धानी की चित्रकलाएं आकर्षण का केंद्र रहीं।

इस मौके पर न्यायाधीश सुशील कुमार ने मानवाधिकार को आधारभूत अधिकार बताया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता, शिक्षा, समानता और अभिव्यक्ति के अधिकार मानवाधिकारों की श्रेणी में आते हैं। उन्होंने किसी भी व्यक्ति के अधिकारों का हनन नहीं होने की बात कही। अगर कोई इसका हनन करता है तो उसके खिलाफ आवाज उठाई जाए ताकि अपने अधिकारों के लिए हम सब एकजुट होकर खड़े हो सके उनसे लड़ सके। अपने अधिकारों को जानना बहुत ही जरुरी है जिसमें आप अपने लिए लड़ सके।

प्रदर्शनीमें अधिकारों के बारे में दी जानकारी

कार्यक्रममें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंघल, नरेश कुमार सिंघल, जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संजय शर्मा सहित कई अधिकारी एवं बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता उपस्थित थे।

उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति विशेष के लिए होकर, समूचे जन-मानस के लिए है। इस प्रकार की प्रदर्शनी लोगों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी देती हैं। इसीलिए ऐसे कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित होने चाहिए।