पढ़ाई छोड़ बनाया गिरोह, 2 काबू
कलानौरके तीन दोस्तों ने पढ़ाई छोड़कर चोर गिरोह बना लिया। पहले तो गरीबी से उभरने के लिए वारदात अंजाम दी, बाद में ऐशोआराम की लत शौक पूरे करने के लिए बाइक चोरी को आदत बना लिया।
गिरोह का सरगना सुल्तान उर्फ टीनू यह कहकर बालाजी चला गया कि काफी माल एकत्रित हो गया है। राजस्थान से आकर बेचेंगे, लेकिन उससे पहले ही गिरोह के दो सदस्यों सुनील प्रेमचंद को सीआईए वन ने धर दबोचा। उनके कब्जे से 10 चोरी की बाइक बरामद की गई हैं।
पांचसेकेंड में बाइक पर हाथ साफ
देररात सीआईए इंस्पेक्टर मनोज वर्मा को भनक लगी कि बाइक चोर गिरोह के दो सदस्य भिवानी रोड पर हैं। योजना के तहत दबिश देकर कलानौर निवासी सुनील प्रेमचंद को धर दबोचा। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गिरोह के चार सदस्य मिलकर वारदात अंजाम देते थे।
दो सदस्य आसपास नजर रखते, जबकि टारगेट की गई बाइक के पास खड़े होकर बातचीत करते रहते, ताकि बाइक मालिक जाए तो लगे कि युवक किसी काम से खड़े हैं। जब लगता अब कोई नहीं रहा तो एक साथी मास्टर चाबी से लॉक खोलता और दोनों उसी बाइक पर बैठकर चंपत हो जाते।
सुनीलऔर प्रेमचंद तलाशते थे ग्राहक
धरेगए युवकों ने पुलिस को बताया कि गिरोह में बाइक चुराने का कार्य सुल्तान दूसरे साथी का रहा। वे बाइक मिलने के बाद ग्राहक की तलाश में रहते थे। 20 से 30 हजार की बाइक 8 से 10 हजार रुपए में बेच देते।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे 10 बाइक बरामद की है। अब पुलिस रिमांड पर लेकर आरोपियों से यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि उन्होंने कितनी बाइक किसको बेचीं हैं। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने बीकानेर मिष्ठान भंडार से हजारों रुपए की नकदी उड़ाई थी। आरोपियों के खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज है। पुलिस आसपास के थाना क्षेत्रों में भी आरोपियों के रिकॉर्ड को खंगालने में जुटी हुई है।
ऐसे किया बाइक चुराने का फैसला
सुनीलने पुलिस को बताया कि वह एक हलवाई की दुकान पर काम करता था। किसी काम के चलते उसके पिता ने दुकान वाले से करीब दस हजार रुपए उधार लिए थे। सुनील का दुकान पर काम करने का मन नहीं था। इसके चलते वह नौकरी छोड़ना चाहता था, लेकिन नौकरी छोड़ने से पहले उसे दुकान वाले को दस हजार रुपए देने थे। इसके चलते उसने बाइक चुराकर बेचने का फैसला किया।
रोहतक. सीआईवन स्टाफ के साथ चाेरी की मोटर साइकिलों के आरोपी।