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बाल विवाह की सूचना तुरंत दें, अधिकारों को जानें

7 वर्ष पहले
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संविधानमें महिलाओं के लिए बहुत अधिकार दिए हैं, लेकिन जागरुकता की कमी और अज्ञानता के कारण महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में पता नहीं चलता। लड़कियों को उनके अधिकारों, लिंग-भेद, घरेलू हिंसा अन्य सामाजिक बुराइयों के बारे में गुरुवार को आयोजित एनएसएस कैंप के सातवें दिन जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी करमिंदर कौर ने जानकारी दी। जिसका आयोजन राजकीय महिला महाविद्यालय लाखनमाजरा में किया गया।

इस मौके पर करमिंदर कौर ने कहा कि युवा लड़कियों की महत्वपूर्ण भूमिका बनती है कि वह अपने अधिकारों को समझें और उसके प्रति जागरूक हों। उन्होंने ने कहा कि सरकार ने 2005 में घरेलू हिंसा महिला संरक्षण कानून बनाया है। ताकि महिलाएं पर छोटी-छोटी बातों पर ताने, मार-पिटाई, मानसिक प्रताड़ना की शिकार हों। हिंसा का मुकाबला जागरूक, संगठित और निडर होकर कर सके। इसके साथ ही उन्होंने युवा लड़कियों को सचेत किया कि वह किसी के बहलावे में आएं। यदि उनके साथ किसी प्रकार की कोई अनैतिक हरकत कर रहा है तो वह डरे नहीं निडर होकर सामने आएं और उसके खिलाफ आवाज उठाएं। बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है और इसे समाज में जागरुकता के माध्यम से खत्म किया जा सकता है। गरीबी, अज्ञानता, भी बाल विवाह के लिए जिम्मेदार हैं। समाज में लड़कियों को बोझ समझा जाता है जिससे उनकी शादी जल्दी कर दी जाती है। कम उम्र में शादी और फिर बच्चे पैदा होने से उनके शरीर पर इसके दुष्प्रभाव पड़ता है। उन्होंने ने छात्राओं से अपील की यदि उनके आसपास कोई भी बाल विवाह हो तो उसकी तुरंत सूचना बाल विवाह निषेध अधिकारी को दें। इस मौके पर रेणु, सुशीला, हरियाणा सूचना अधिकार मंच के राज्य संयोजक एवं आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष, सेंट्रल यूनिवर्सिटी महेंद्रगढ़ सहायक प्रोफेसर डॉ. दिनेश मौजूद रहे।

लाखनमाजरा स्थित रा.महिला महाविद्यालय में एनएसएस कैंप के दौरान कानून के बारे में जानकारी लेती छात्राएं। (इनसेट) कानून के बारे में जानकारी देती प्रोटेक्शन अधिकारी करमिंदर कौर