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बांग्ला साहिब में श्रद्धालुओं ने माथा टेककर लिया आशीर्वाद

7 वर्ष पहले
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सतगुरुनानक देव के प्रकाशोत्सव पर गुरुवार को गुरुद्वारा बांग्ला साहिब में भव्य आयोजन किया गया, जिसमें सुबह अखंड पाठ साहिब का भोग डाला गया। हजूरी रागी जत्था पवन दीप सिंह, स्त्री सत्संग सभा तथा बाहर से आए जत्थों भाई करमबीर सिंह हजूरी रागी जत्था श्री दरबार साहिब ने शबद-कीर्तन द्वारा संगत को निहाल कर दिया। इस मौके पर हजारों की संख्या में आए श्रद्धालुओं ने गुरु पर्व की एक दूसरे को बधाई दी और लंगर छका। विधायक मनीष ग्रोवर ने गुरु बांग्ला साहिब पहुंचकर मत्था टेका और आशीर्वाद प्राप्त किया। गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी की ओर से उन्हें सिरोपा भेंट किया गया।

इस अवसर पर मुख्य बंग्ला साहिब के प्रधान सरदार अवतार सिंह कोचर ने गुरुदेव नानक देव के बारे में बताया। कहा कि उनका प्रकाश तलवडी में पिता महता कालू एवं माता तृप्ता के घर 1469 में हुआ। गुरु का प्रकाश स्थान होने के कारण राय भोए की तलवडी गांव अब ननकाना साहिब के नाम से मशहूर है।

पिता की इच्छा रही कि बेटा खानदानी कामकाज संभाले, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एक बार जब पिता ने व्यापार के लिए 20 रुपए दिए तो उन्होंने उस पैसे साधु संतों को भोजन करा दिया। पूछने पर बताया कि उन्होंने जीवन का सच्चा सौदा किया है। आगे चलकर गुरु नानक ने नवाब के यहां मोदीखाने में नौकरी की। जहां से वे जरूरतमंदों की हर वक्त मदद करते रहते। शिकायत होने पर जांच की गई तो पता चला कि मोदीखाना मुनाफा में था। इस बीच उन्हें वैराग्य हो गया। उन्होंने चार उदासी यात्राएं की। भाई मरदाना के साथ पूर्व में कामाख्या, पश्चिम में मक्का मदीना, उत्तर में तिब्बत और दक्षिण में श्रीलंका तक गए। वर्ष 1522 में करतारपुर साहिब को अपना निवास स्थान बनाया और खेती करने लगे। यहीं 1532 में भाई लहणा से मुलाकात हुई। सात वर्ष तक गुरु नानक की सेवा करने के बाद लहणा उनकी गद्दी के अधिकारी हुए। गुर नानक देव 1539 में जोति जोत में समा गए।

बांग्ला साहिब में गुरुनानक देव के प्रकाशोत्सव पर लंगर के दौरान प्रसाद ग्रहण करते श्रद्धालु।

रोहतक. जींदरोड स्थित गुरुद्वारा बांग्ला साहिब में गुरुनानक देव के प्रकाशोत्सव पर शबद कीर्तन के दौरान प्रवचन सुनते श्रद्धालु।