पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • इंजीनियरिंग की गुड़िया ने कला से बनाई खुद की पहचान

इंजीनियरिंग की गुड़िया ने कला से बनाई खुद की पहचान

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
बचपनमें आड़ी तिरछी लकीरें बना उनमें रंग भरने वाली नन्ही सी गुड़िया का हौसला इतना बुलंद हो गया कि आज सिर्फ वह बड़ी-बड़ी हस्तियों की तस्वीरें बना रही है, बल्कि उनको भेंट भी कर रही है। शौक कब आदत बन गया और पेंटिंग के क्षेत्र में जिन ऊंचाइयों को छुआ, उसके लिए कई प्रशस्ति पत्र भी मिले। हम बात कर रहे हैं डीएलएफ कॉलोनी में रहने वाली नेहा की। जो पढ़ाई तो आंकड़ों की कर रही है, लेकिन शौक पेंटिंग के जरिये अपनी भावनाओं को कागज पर उतारने का है। बीटेक की पढ़ाई भी उसका रुझान पेंटिंग से नहीं हटा सकी।

पेंसिलसे चित्र बनाते थे पापा

पुलिसमें एएसआई पिता देवी सिंह की कला ठीक-ठाक थी। वह ड्यूटी से समय निकालकर कच्ची पेंसिल से कोई कोई तस्वीर बनाते रहते थे। नेहा जब छोटी थी तो उसने पिता से पूछा कि क्या वह भी ऐसा कर सकती है। आदमी चाहे तो क्या नहीं कर सकता, पिता के इस बयान ने नेहा को नया रास्ता दिखा दिया। कक्षा 8 में पहुंची तो पेंटिंग का शौक जुनून में बदल गया।

पेंटिंगगिफ्ट करने का है शौक

पेंटिंगबनाने के बाद उसे अपने घर में सजाने की बजाय नेहा का शौक पेंटिंग गिफ्ट करने का है। उभरते सितारे प्रतिभावान व्यक्ति उसके रंगों से बच नहीं पाते। उसका मानना है कि जो प्रतिभा उसके पास है, उसे तो कोई छीन नहीं सकता, लेकिन पेंटिंग गिफ्ट करके में उस व्यक्ति को अपनी भावनाओं से अवगत जरूर करा सकती हूं।

तुममेरी दूसरी कल्पना हो

2007में जब एपीजे अब्दुल कलाम देश के राष्ट्रपति थे, नेहा ने उनकी पेंटिंग बनाकर उन्हें गिफ्ट की। खास बात यह थी कि उनके रिटारयमेंट के ठीक दो दिन पहले ही नेहा को उनका प्रशस्ति बधाई पत्र आया। इसके बाद सोनिया गांधी, प्रतिभा पाटिल को उनकी पेंटिंग बनाकर गिफ्ट की। नेहा के लिए सबसे खास और यादगार पेंटिंग थी कल्पना चावला की जिसे उसने खुद जाकर उनके पिता बनारसी लाल चावला को उनके हाथों में दी। उस पेंटिंग को देखते ही वह भाव-विभोर हो उठे और उनके मुंह से अनायास ही निकल पड़ा कि अब तुम मेरी दूसरी कल्पना हो। यह शब्द नेहा के लिए भी बहुत अनमोल थे। नेहा आज भी उनसे बात करती है और एक बेटी होने का पूरा फर्ज अदा कर रही है। हाल ही में उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उनकी पेंटिंग बनाकर भेजी है।

पेंटिंगफाड़ दिया करती थी मां

जबनेहा छोटी थी तो उसकी मां संतोष उसकी पेंटिंग जला और फाड़ दिया करती थी, क्यों