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दो साल बाद विवि को आई याद कोर्स के लिए लाएंगे अवेयरनेस

7 वर्ष पहले
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महजएक छात्र के भरोसे चल रहे कोर्स की आखिरकार हेल्थ विवि को याद गई। 2 साल से विद्यार्थियों के लिए तरसा बॉयोटेक्नालॉजी के इस अत्याधुनिक कोर्स को न्याय मिल ही गया। विवि अधिकारियों ने फॉर्मेसी विभाग में जारी फॉर्मास्यूटिकल बॉयोटेक्नालॉजी कोर्स को बढ़ावा देने का फैसला लिया है। इसके तहत प्रबंधन कोर्स को लेकर जागरुकता कार्यक्रम चलाने वाला है।

यही नहीं विवि के अलावा ये कार्यक्रम मान्यता प्राप्त कॉलेजों में भी चलाया जाएगा। ये निर्णय बुधवार को हुई बैठक में कुलपति डाॅ. सांगवान द्वारा लिया गया। बैठक के बाद फॉर्मेसी विभागाध्यक्ष डाॅ. गजेंद्र सिंह ने ये जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एमफॉर्मा कोर्स में भी कम छात्र हैं। इसलिए बैठक में इन दोनों कोर्स को लेकर योजना बनाई गई है।

बता दें कि बॉयोटेक्नालॉजी क्षेत्र में दिलचस्पी दिखाते हुए विवि ने फॉर्मास्यूटिकल बॉयोटेक्नालॉजी कोर्स शुरू किया। एआईसीटीई की मान्यता मिलने के बाद जी-पैट के माध्यम से प्रवेश शुरू हुए, लेकिन आवेदन सिर्फ एक ही छात्र का आया। जबकि इस कोर्स के लिए विवि ने कुरुक्षेत्र विवि से डेपुटेशन पर अलग से एक शिक्षिका को नियुक्त किया है। यही वह कारण है जिसके चलते विवि को एक छात्र पर हर माह करीब 1 लाख 20 हजार रुपए का खर्चा करना पड़ता है।

रीडर्स इम्पैक्ट

कोर्स की मान्यता संकट में

फॉर्मास्यूटिकलबायोटेक्नॉलॉजी कोर्स की मान्यता संकट में दिखाई दे रही है। एआईसीटीई के नियमों के मुताबिक कोर्स शुरू होने के 3 साल तक सीटों का अवलोकन किया जाता है। इसके बाद ही कोर्स भविष्य में जारी रखने का फैसला लिया जाएगा। अगर अगले साल भी हालत ऐसे ही रहे, तो इस कोर्स को जारी रखना प्रबंधन के लिए मुश्किलों भरा हो सकता है।

16 नवंबर को बायोटेक्नॉलॉजी के सेमिनार

बैठकके बाद फॉर्मेसी विभाग में शिक्षकों की बैठक हुई। इसके बाद आगामी 16 नवंबर से एक सप्ताह तक प्रतिदिन बायोटेक्नॉलॉजी के इस कोर्स को लेकर विद्यार्थियों को जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा विवि से मान्यता प्राप्त कॉलेजों के विद्यार्थी भी इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। डाॅ. सिंह ने बताया कि इसी दौरान राष्ट्रीय फॉर्मा सप्ताह होने से ये कार्यक्रम श्रेष्ठ भी है।

नहीं होने देंगे कोर्स बंद

^विभागमें काफी मुश्किलों से ये कोर्स लाया गया है। इसे किसी भी हाल में बंद नहीं होने देंगे। बॉयोटेक्नाल