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परिवारों को परंपरा और संस्कृति का पाठ पढ़ाएगा आरएसएस
समयकी भागदौड़ के साथ परंपराओं और संस्कृति से दूर होते परिवारों को दोबारा से पैतृक जड़ों से परिचित कराने और देश के भविष्य को संवारने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) परिवार प्रबोधन का कार्यक्रम चलाने जा रहा है। रोहतक, करनाल और पानीपत के शहरों में एक साथ शुरू किए जाने वाले इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जा चुकी है। इसमें प्रकृति के चक्र और पशु-पक्षियों के प्रति मनुष्य की जिम्मेदारी की भी सीख दी जाएगी।
परिवार प्रबोधन के कार्यक्रम के तहत नव विवाहित दंपत्तियों को बुलाकर समूह बनाकर कार्यक्रम में शिक्षा दी जाएगी। परिवार के बच्चों अगली पीढ़ी को मूलरूप से इस संस्कार सिखाने पर जोर दिया जाएगा। इसी कारण से इस क्रम में नव विवाहित को ही जोड़ा जाएगा, ताकि वे अपनी संतानों को अपनी मूल जड़ों संस्कारों से परिचित करा सके और बच्चे संस्कारी बन सके। बता दें कि इस कार्यक्रम के तहत अब तक फरीदाबाद, गुडग़ांव, पंचकुला अंबाला शहर में कार्यक्रम सफलता पूर्वक चलाए जा चुके हैं। इन कार्यक्रमों की जिम्मेदारी प्रांत प्रमुख अशोकजी को सौंपी गई है।
समयकी जरूरत संस्कार
आरएसएसके प्रांत प्रचारक सुधीरजी के मुताबिक परंपराओं से कभी दूर नहीं होना चाहिए। समाज और घर को सुंदर बनाने के लिए संस्कारों का होना बेहद जरूरी है। फिर आज के माहौल में संस्कार की जरूरत भी हैं।
ये है मकसद
आजके तेजी के जीवन में चिंतन कम होकर श्रद्धा दुर्बल बन रही है। हर कोई एक-दूसरे का अनुकरण कर सिर्फ एक यंत्र की तरह ही काम रहा है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवार प्रबोधन का कार्यक्रम शुरू किया गया है।