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पड़ोसी मुल्क की बेटी को न्याय दिलाने के लिए जगाई अलख
पड़ोसीमुल्क नेपाल की बेटी को न्याय दिलाने के लिए शहरवासी रविवार की शाम दोबारा सड़क पर उतरे। मानसरोवर पार्क स्थित शहीद स्मारक से गांधी पार्क तक सामूहिक कैंडल मार्च निकालकर विरोध जताया। नारी उत्पीड़न और जुल्म-अत्याचार के खिलाफ शपथ ली। मानवता की खातिर दुष्कर्मियों को गिरफ्तार कर उन्हें फांसी देने की मांग हुई। दिल्ली रोड पर ढाई घंटे तक चले प्रदर्शन में बार-बार पुलिस, नेता तथा सरकार विरोधी नारे लगे। स्लोगन लिखी तख्तियों को हवा में लहराते हुए बोला गया मौसम बदला, नसीबां नहीं। इस दौरान पुलिस अधीक्षक के मौके पर पहुंचते ही भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा। चौतरफा सवालों की झड़ी के बीच एसपी ने शीघ्र मामले के पर्दाफाश का आश्वासन दिया। तब जाकर लोगों का गुस्सा कुछ हद तक शांत हुआ।
महिला,युवाबुजुर्ग शामिल
घटनाके चौथे दिन शाम 4 बजे लोग मानसरोवर पार्क में जुटने लगे। इसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों, एनजीओ, धार्मिक सामाजिक संस्थाओं के अलावा भारी तादात में अभिभावक, महिलाओं और युवाओं ने पहल रही। शुरुआत भाषण से हुई, लेकिन थोड़ी ही देर में महिलाएं ऐतराज जताते हुए खड़ी हो गईं कि वे बयानबाजी करने नहीं कैंडल मार्च निकालने आए हैं। इसके बाद कुछ पल में हर हाथ मानवता की खातिर जले ज्योति पुंज से रोशन हो गए।
नाम सामने आए : मामलेकी जांच कर रही स्पेशल टीम के अलावा सात अन्य टीमों को दो दिन की जांच में बेहद अहम सुराग मिले हैं। कुछ नाम भी पुलिस के पास पहुंच चुके हैं, जिनके घटना में शामिल होने की उम्मीद है। अब सिर्फ यह जांच की जा रही है कि मृतक युवती के घर (चिन्योट कॉलोनी) और घटनास्थल (बहु अकबरपुर) से उनका कितना कनेक्शन है। पुलिस ने उन व्यक्तियों को ट्रेस भी कर लिया है। अब उनकी निगहबानी की जा रही है।
प्रदर्शन में बदल गया मौन जुलूस
पूर्वसूचना के अनुसार मूल प्रवाह अखिल भारत नेपाली एकता समाज ने रविवार की शाम कैंडल के साथ मौन जुलूस निकालने का निर्णय किया था, जिसमें शहरवासी शामिल हुए। शुरुआत में ही कुछेक लोगों ने होशियारी और पूरा आयोजन हाईजैक कर लिया। फिर तो मौन जुलूस प्रदर्शन में तब्दील हो गया। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बावजूद पुरुषों ने जुलूस की फ्रंट लाइन पर कब्जा रखा। इसके लिए कई बार उन्हें झिड़की भी सुनने को मिली। डी पार्क पर एकबारगी हुजूम तनातनी के बीच गुट में बंट गया। बाद में समझाने के बाद लोग एक साथ हुए।
महिलाओं पर अत्याचार, सरकार जिम्मेदार
एकहाथ में मोमबत्ती तो दूसरे में तख्ती पर लिखे स्लोगन दिल को झकझोरने वाले थे। लड़कियाें का मान घटेगा हिंसा और अपराध बढ़ेगा, बदमाशों से रक्षा चाहिए हिंसा नहीं सुरक्षा चाहिए, महिलाओं पर अत्याचार कौन है इसका जिम्मेदार/ ये सरकार ये सरकार, सेव गर्ल्स, बेटियों को बचाओ, और कितनी निर्भया हैवानियत की भेंट चढ़ेंगी, किस पर आज करें विश्वास प्रशासन से अब नहीं आस, बेटियों को सुरक्षा दे सके वह सरकार निकम्मी है जैसी लाइनें अवाम के दिल का दर्द बयां कर रही थीं।
बापू पार्क की ओर बढ़े कदम, डीसी-एसपी को ज्ञापन देने पर अड़े लोग
मानसरोवरपार्क से निकलते ही आगे-आगे चल रही महिलाओं के कदम आंधी की तरह बढ़ने लगे। आयोजकों की धीरे चलने की कोशिशें बेकार हुईं। जन सैलाब बापू पार्क पहुंचने को बेताब रहा। बजरंग भवन रेलवे फाटक पार करते ही आगे-आगे चल रही पुलिस पीसीआर और जन समूह के बीच फासला कम हुआ तो नजर पड़ते ही पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी होने लगी। थोड़ा और आगे बढ़कर लोग सड़क पर बैठ गए। 15 मिनट नेतृत्व करने वालों ने संबोधित किया। उसके बाद चल पड़े। माॅडल टाउन स्थित बापू पार्क पहुंचकर लोग नारेबाजी करने लगे। हाथ उठाकर सबने महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को खत्म करने की शपथ ली। आरोपित किया कि प्रशासन संवेदनहीन होता जा रहा है। डीसी अथवा एसपी को मौके पर बुलाने की जिद में तहसीलदार से लेकर एएसपी तक के अधिकारियों को लौटा दिया गया।
नेपाल की युवती के साथ दरिंदगी का खुलासा हुए चार दिन बीत गए हैं। फिर भी मामले का खुलासा होने के कारण आक्रोशित हुए लोगों ने एक तरफ जहां दिल्ली बाईपास पर लोगों ने जाम लगा दिया, वहीं दूसरी तरफ पुलिस 48 घंटे की जांच में बेहद अहम सुराग मिलने की बात कह रही है। कुछ लोग पुलिस के निशाने पर हैं, जिनमें आरोपियों के होने की संभावना है। सामने आए उक्त लोगों की साइंटिफिक वेरीफिकेशन के बाद सबूत जुटाए जा रहे हैं, ताकि आरोपियों को राहत मिल सके और कोर्ट में पर्याप्त सबूत रहें।
एडीजी के निरीक्षण के दौरान घटनास्थल के आसपास खेतों में जांच करती पुलिस।