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श्रीकृष्ण की बाल लीला में अद्भुत माधुर्य
बैंक्वेटहॉल में चल रही भागवत कथा के चौथे दिवस गुरुवार को नंदोत्सव का आयोजित हुआ। श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की मोहक झांकी सजाई गई। गोवर्धन पूजा में सैकड़ों की संख्या में शामिल श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। इस मौके पर बाल व्यास केशव कृष्ण ने कहा कि योगेश्वर श्रीकृष्ण की बाल लीला की झांकी का माधुर्य अद्भुत है। भक्त उसमें लीन हो जाता है। भक्ति की रसधार में उसे पारलौकिक अनूभूति होती है, जहां से जीव आध्यात्मिक यात्रा पर चल पड़ता है।
ज्ञानकी अपेक्षा भक्ति मार्ग सहज
केशवकृष्ण ने कहा कि ज्ञान मार्ग की अपेक्षा भक्ति मार्ग सहज और सरल है। इसकी कसौटी समर्पण है। अपने आराध्य का ध्यान करते ही भक्त भाव की गहराई में स्वत: उतरने लगता है। सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। मन को पूर्ण शांति मिलने लगती है। यशोदानंदन की बाल लीला जीवन के सबक से भरी पड़ी है। भागवत कथा में नियमित शामिल होकर श्रद्धालु लाभांवित हो सकता है।
लक्ष्यका पता परिणाम का
गोवर्धनपूजा प्रकृति के संरक्षण संवर्धन का श्रेष्ठ उदाहरण है। दुनिया वालों के लिए एक सबक भी। आज प्रकृति से विरोध पालकर हम प्रगति के जहाज पर उड़े जा रहे हैं। लक्ष्य का पता है और परिणाम का। हजारों साल पहले श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को देवता मानकर पूजा की। महत्त्व समझाते हुए उसे सुख-समृद्धि का मूल कारण बताया है।आज मानव भौतिकता की चकाचौंध में उलझा हुआ है। सुख की तलाश में जहां तहां भटक रहा है, जबकि सब कुछ उसके भीतर ही है। इसका ज्ञान कराने की शक्ति सत्संग में होती है। जहां भगवान की महिमा का गुणगान होता रहता है। इस अवसर पर भगवान की मंगल आरती की गई, जिसमें भक्तों ने उत्साह से भागीदारी की। इसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिवस गोपी संवाद आैर रुकमणि विवाह की संगीतमय कथा होगी, जो अपने आराध्य के प्रति अनन्य प्रेम का उदाहरण है। माता रुकमणि ने निष्कपट भाव रखा तो उन्हें श्रीकृष्ण के सानिध्य का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह जानकारी डेरा बाबा बालक पुरी के महंथ कर्ण पुरी महाराज ने दी। उन्हाेंने भक्तों से कथा में उपस्थित होने आग्रह किया है।
ग्रीन रोड स्थित सोहम मंदिर में श्रीमदभागवत कथा के दौरान प्रवचन सुनते श्रद्धालु। (इनसेट) श्री हित अंबरीश।
भगवान के अनुग्रह से ही मिलता है सत्संग का सौभाग्य : श्री हित अंबरीश
रोहतक | श्रीहित अंबरीष ने