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एमडीयू में डेढ़ साल की होगी एमफिल

7 वर्ष पहले
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एमडीयूसे एमफिल करने वाले विद्यार्थियों को अब डेढ़ साल तक पढ़ाई करनी होगी। अभी तक एक साल की एमफिल होने के चलते शोध को गुणवत्ता नहीं मिल पा रही थी, लेकिन अब यूजीसी की ओर से इसका नया प्रारूप तैयार कर शोध की गुणवत्ता को बढ़ाने का मन बना लिया है।

इसके लिए संशोधन करते हुए 5 जुलाई 2014 के यूजीसी गजट नोटिफिकेशन के तहत फैसला लिया गया है। इस संदर्भ में यूजीसी सचिव प्रो. जसपाल एस संधु ने पत्र लिखकर विश्वविद्यालय को संशोधन के तहत नियमों को अमलीजामा पहनाने का फरमान जारी किया है।

इसलिएलिया फैसला

फिलहालएमडीयू में एमफिल के एक साल के शोध को लेकर अक्सर गुणवत्ता पर अधिक काम नहीं हो पाता था। अब इसकी गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए छात्र को शोध पर पूरा ध्यान देने का समय मिल सकेगा और इसके लिए व्यवहारिक कार्य भी हो सकेगा।



इन कोर्सें के बदले नाम

अबसेक्शन 22 के यूजीसी एक्ट 1956 के तहत नए संशोधन किए गए हैं। इसके तहत अब बीजेएमसी कोर्स का नाम बीए जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, एमजेएमसी का नाम एमए जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, बीएचएम, एमएचएम, बीटीएम एमटीएम की फुल फार्म लिखनी होगी, एमपीएड के एक साल के कोर्स के लिए बीपीएड करनी जरूरी होगी। बीपी एड के लिए बीए होना जरूरी होगा। पहले सीपीएड वाला भी कर सकता था।

अब मिलेगी दूसरे इंस्टीट्यूट की नई डिग्री

विविपरिसर में बने मास्टर ऑफ होटल मैनेजमेंट एंड मास्टर ऑफ टूरिज्म मैनेजमेंट का नाम बदलने की तैयारी की जा रही है। भविष्य में जो विद्यार्थी इनमें दाखिला लेंगे, उन्हें नए नाम के इंस्टीट्यूट की डिग्री मिलेंगी। हालांकि अभी मास्टर ऑफ होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी और मास्टर ऑफ टूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट करने का सुझाव है। इस पर एसी की बैठक में मंथन किया जाएगा।

नए कोर्स की छह महीने पहले लेनी होगी मान्यता

वहींयूजीसी ने नए नियम जारी करते हुए विश्वविद्यालय को आगाह किया है कि यदि कोई कोर्स यूजीसी से हटकर है और विवि में उस नए कोर्स को लागू किया जाना है तो उसकी मान्यता के लिए छह माह पहले ही यूजीसी में आवेदन करना होगा। उसके बाद पाठ्यक्रम और उसके नियमों की जानकारी भी देनी होगी। इस आदेश की पालना होने पर यूजीसी की ओर से कोर्स को भी अमान्य करार दिया जाएगा। इसके बाद भी प्रोविजन मानें जाने पर यूजीसी विवि कॉलेज के खिलाफ कड़े कदम भी उठा सकती है।