ट्रामा सेंटर के उद्घाटन की रह गई कसक
\\\"ट्रामासेंटर शुरु हो जाता, तो सारे सपने पूरे हो जाते।\\\' ये उम्मीद हेल्थ विवि के कुलपति डॉ. सुखबीर सिंह सांगवान ने सेवानिवृत होने से पहले कहे।
गुरुवार को कुलपति कार्यालय में डॉ. सांगवान ने अपना पदभार प्रो-वीसी डॉ. वीके जैन को सौंप सेवानिवृति ली। इस मौके पर डॉ. सांगवान ने अपने कार्यकाल से जुड़ी कई महत्वपूर्ण यादों को साझा किया। उन्होंने कहा, \\\"हेल्थ विवि की स्थापना करना मेरा सपना था। पीजीआई का विकास मेरे लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहा। परमात्मा की कृपा से पीजीआई परिसर में ऐतिहासिक इमारतें खड़ी हैं।
झगड़ाकरने नहीं आते मरीज: अगरट्रामा सेंटर के साथ-साथ पीजीआई में अत्याधुनिक मशीनें जाती, तो मेरे सारे सपने पूरे हो जाते।\\\' उन्होंने कहा कि \\\"मरीज अस्पताल उपचार के लिए आता है, कि झगड़ा करने के लिए। इसलिए डॉक्टर को शांत व्यवहार का होना चाहिए।\\\' अभी तक की खामियों को लेकर डॉ. सांगवान बोले, \\\"कई मुद्दे ऐसे हैं जो कुछ कमियों के कारण अधर में लटके। कई खामियां भी सामने आई, लेकिन सामने आई इन सभी खामियों का जिम्मेदार मैं स्वयं हूं। लंबित प्रस्तावों को लेकर मैं सरकार पर दोष नहीं लगाता। जो भी है वो मेरा दोष है।\\\'
कुलसचिव डॉ.सरला हुड्डा ने कहा कि उन्हें कुलपति के अच्छी सेहत के साथ सेवानिवृत होने की खुशी है। इस अवसर पर डीएन एकेडमिक अफेयर्स डॉ. सुषमा सूद आदि रहे।
विकास का दूसरा नाम है सांगवान
पिछले6 सालों में कुलपति डॉ. सांगवान ने पीजीआई के विकास में अहम भूमिका निभाई। हेल्थ विवि की स्थापना से लेकर अब तक डॉ. सांगवान ने अपने प्रयासों से नई ओपीडी, मदर एंड चाइल्ड अस्पताल, ट्रामा सेंटर, छात्रावास, दंत चिकित्सालय के न्यू पोस्टग्रेजुएट ब्लॉक, सुपरस्पेशिलिटी ब्लॉक को बढ़ाना, राज्य का एकमात्र मेंटल हेल्थ अस्पताल, स्टेट ऑफ आर्ट ऑडिटोरियम नर्सिंग कॉलेज की इमारत इत्यादि उपलब्ध कराई। इसके अलावा बॉयोटेक्नालॉजी एंड मॉलीक्यूलर मेडिसिन विभाग, योगा सेंटर, फॉर्मास्यूटिकल एंड हर्बल गार्डन, मॉडर्न ऑर्थोपेडिक टीचिंग लैब शुरु कराई। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत मॉडर्न ओटी कॉम्प्लैक्स, अत्याधुनिक मशीनों के अतिरिक्त पीजीआई के विकास के लिए 150 करोड़ रुपए मंजूर कराए।
यूं चला कार्यकाल
वर्ष1992 से 2006 के दौरान डॉ. सांगवान ने अस्थिरोग विभागाध्यक्ष रहते हुए कई बड़ी जिम्मेदारियां संभाली। इसमें वर्ष 2001