एप्रन नहीं पहना तो डॉक्टरों की खैर नहीं
समाजमें डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है। डॉक्टर जिस सफेद कोट यानि एप्रन को धारण करता है, उसकी वजह से ही डॉक्टर को समाज में सम्मान मिलता है। अगर पीजीआई में डॉक्टर बिना एप्रन के मरीज का उपचार करते मिले, तो अब उनकी खैर नहीं। प्रबंधन इस मामले में ठोस निर्णय लेगा। ये कहना है हेल्थ विवि के प्रभारी कुलपति डॉ. वीके जैन का।
गुरुवार को कुलपति डॉ. सांगवान की सेवानिवृति होने के बाद प्रतिकुलपति डॉ. जैन को कुलपति का प्रभार सौंपा गया। इस मौके पर डॉ. जैन ने दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत में कहा कि जब तक नए कुलपति की नियुक्ति नहीं होती, तब तक विवि के कार्य अच्छे से जारी रहेंगे। साथ ही पीजीआई की व्यवस्थाएं भी सुचारु रहेंगी। चर्मरोग विभाग के अध्यक्ष प्रतिकुलपति की जिम्मेदारी निभाने वाले डॉ. वीके जैन अब निदेशक चिकित्सा अधीक्षक के साथ मिलकर बार-बार अस्पताल में औचक निरीक्षण करने की बात कही।
ओपीडी में रोज 200 से ज्यादा चर्मरोगियों का इलाज कराने वाले डॉ. जैन को इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वर्ष 1986 में उन्हें फैलोशिप से नवाजा गया साथ ही डॉ. आरवी राजम टीचर एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित भी किया गया। डॉ. जैन के अब तक राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय जनरलों में 115 शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी मेनुअल ऑफ स्कीन डीसिज फोर अंडरग्रेजुएट विषय पर डॉ. जैन द्वारा लिखी गई पुस्तक आज भी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में खासा लोकप्रिय है।
वर्ष 1970 में भिवानी से रोहतक आए डॉ. जैन ने पीजीआई से एमबीबीएस की पढ़ाई की। 1979 में चर्मरोग में एमडी की डिग्री लेने के बाद डॉ. जैन 2 साल तक कुलसचिव पद पर नियुक्त रहे। वहीं लैक्चरार रीडर पद पर पांच साल, तीन साल सहायक प्राध्यापक, 12 साल से चर्मरोग विभागाध्यक्ष के साथ-साथ अधिष्ठाता पद पर भी रह चुके हैं। 22 अगस्त 2014 को डॉ. जैन को प्रतिकुलपति का कार्यभार सौंपा गया।
डॉ. वीके जैन।