साहब! ऐसे तो भगवान भी नहीं तड़पाता
बच्चीकी मौत पर शुरू हुई हड़ताल सेे प्रदेश के एकमात्र पीजीआई में बेकसूर मरीजों की जान पर बन आई है। डॉक्टर और आरोपी परिजन जहां एक-दूसरे को कानूनी दांव पेंच में कसने पर अड़े हैं, वहीं पीजीआई प्रबंधन के अधिकारी रेजिडेंट्स डॉक्टरों के साथ बातचीत की पहल करने की बांट जोह रहे हैं। जींद से आए प्रवीन मां नंदकौर को लेकर पीजीआईएमएस में पहुंचे, ये आपातकालीन विभाग के बाहर ही इंतजार करते रहे। ब्लड प्रेशर के कारण महिला की हालत बिगड़ती जा रही थी। इन्हें करीब एक घंटे तक इलाज नहीं मिल सका। प्रवीन ने बताया कि उनकी मां का ब्लड प्रेशर भी नहीं जांचा गया है, जबकि कई बार इसके लिए चक्कर लगा चुके हैं। प्रवीन बोले कि कैसे डॉक्टर हैं यहां पर। देख रहे हैं कि मरीज को सीरियस प्रॉब्लम हैं। फिर भी कोई सुनवाई नहीं करता है। इंजेक्शन भी नहीं लगाया है। साहब! इस तरीके से तो भगवान भी नहीं तड़पाता है।
नहींदी दवा, वार्ड में भेजा
प्रतापमोहल्ला से आए अर्जुन देव नारंग बुखार से ग्रस्त प|ी को लेकर आपातकालीन विभाग में पहुंचे। वहां पर डॉक्टर नहीं मिले और काफी देर तक इंतजार करने के बाद वापस लौटना पड़ा। कर्मचारियों द्वारा उन्हें मरीज को वार्ड में जाने के लिए कहा गया। वार्ड का रास्ता पता होने के चलते उन्हें काफी देर तक इधर-उधर सड़कों पर चक्कर काटने पड़े। बाद में सुरक्षा कर्मी द्वारा उन्हें वार्ड में पहुंचाया गया।
नर्सआई चादर डालकर चली गई
झज्जरके खरावड़ निवासी 55 वर्षीय धनवती ने पेट में दर्द शिकायत की। बेटा बिजेंदर सुबह 9 बजे उसे लेकर पीजीआई गए। हड़ताल के बारे में पता नहीं था। इमरजेंसी में देखने से ही डॉक्टरों ने मना कर दिया। जिद करके इमरजेंसी वार्ड में बेड पर लिटा दिया। डॉक्टर के आने की उम्मीद करते रहे। इस बीच धनवती ने दम तोड़ दिया। रोने की आवाज सुनकर एक नर्स आई और शव पर चादर डालकर चली गई।
नहींहो रही मरीजों की देखबाल
शहरके भिवानी चुंगी निवासी 68 वर्षीय ओम प्रकाश मजदूरी करते हैं। वे श्वास रोग से ग्रसित हैं। हफ्ते में 2 बार इलाज के लिए पीजीआई आना पड़ता है। तीन दिन से इमरजेंसी वार्ड में पड़े हुए हैं। सांस लेने के लिए मास्क लगा हुआ है। बगल वाले मरीज के परिजन मंजीत ने बताया कि ओम प्रकाश की सुबह से देखभाल नहीं हुई है।
पर्चीबनी, डॉक्टर ने नहीं देखा
जींदके मालवीय निवासी आठ वर्षीय सनी का सप्ताह भर प