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- 14 वर्षों से ग्रामीण क्षेत्र में नि:शुल्क शिक्षा दे रहे हैं।
14 वर्षों से ग्रामीण क्षेत्र में नि:शुल्क शिक्षा दे रहे हैं।
जज्बा
शिक्षा के बल पर ही जड़ से भ्रष्टाचार मुक्त होगा समाज
इंटरव्यू ऑफ वीक
क्षा विकसित समाज का प्राण है। इसकी बदौलत राष्ट्र चरित्रवान बनता है। गुरु से मिले इसी सूत्र पर अमल करने वाले 77 वर्षीय डॉ. सूरजभान 14 साल से ग्रामीण क्षेत्र में नि:शुल्क ज्ञान का प्रकाश बांट रहे है। उनका सपना गांव की प्रतिभाओं के लिए ऐसा प्लेटफार्म तैयार करना है, जहां से उनकी उन्नति का द्वार खुल सके। शहर से 12 किमी दूर माड़ौधी स्थित श्री डेरा महाराज दल्लेदास (भीष्म जी) परिसर में उन्होंने लाइब्रेरी स्थापित की है, जहां से संस्कार, आचार-विचार और ज्ञान की अलख जगा रहे हैं।
रोहतक के करौंथा में 1937 में जन्मे सूरजभान शिक्षा दीक्षा को गुरु कृपा मानते हैं। 16 साल की उम्र में संत बाबा दल्लेदास से मिले। 1971 में गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ वुमेन राेहतक में लेक्चरर पद ज्वाइन किया। इसके बाद पठन-पाठन के कार्य में लग गए। बाबा दल्लेदास के उत्तराधिकारी बाबा सुरतन दास के शरीर छोड़ने के बाद वर्ष 2011 में सूरजभान को डेरे का महंथ बना दिया गया।
महंत डॉ. सूरजभान, समाजसेवी
आयोजन का केंद्र बिंदु पठन-पाठन
सुबह10 बजे से दिन में 3 बजे तक वे आश्रम में ही रहते हैं। जहां आने वाले व्यक्ति को शिक्षा के लिए प्रेरित करते हैं। डेरे के आसपास के बनियानी, डोभ, भाली, सुनारियां, गरनावठी और बलम आदि गांवों के बच्चे, युवा और बुजुर्ग महिलाएं यहां पर नियमित आते हैं। हर माह की कृष्णा नवमी को डेरे पर अायोजित होने वाले विशेष आयोजन का केंद्र बिंदु शिक्षा का प्रचार प्रसार ही रहता है।
पूरा हो रहा गुरु का सपना
साढ़ेतेईस एकड़ में फैले श्रीडेरा महाराज दल्लेदास (भीष्म जी) की स्थापना वर्ष 1953 में बाबा दल्लेदास ने की। बाबा स्वयं स्कूली पढ़ाई से वंचित थे, लेकिन शिक्षा को ही सर्वस्व मानते रहे। बकौल सूरजभान अब जीवन का पूरा समय शिक्षा का प्रकाश बांटने में लगाना चाहते हैं। इससे जहां ज्ञान की गंगा बहेगी, वहीं गुरु की शिक्षा के प्रचार प्रसार की इच्छा को बल मिलेगा।
खत्म होगा भ्रष्टाचार
सबसेपहले गुरु के सपने को साकार करने का संकल्प लिया और यहां लाइब्रेरी की स्थापना की, जिसमें आज 18हजार पुस्तकें हैं। धर्म ग्रंथों के अलावा यहां प्रेरणा देने वाली पुस्तकों की भरमार है। कंप्यूटर का भी इंतजाम है। बच्चों, युवाओं, महिलाओं बुजुर्गों को नि:शुल्क पढ़ने