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अहंकार टूटने से व्याकुल नारद ने भगवान विष्णु को दिया श्राप

7 वर्ष पहले
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रामलीलाके प्रथम दिन बुधवार काे भगवान श्रीराम के चरित्र के मंचन की शुरुआत घंटा घड़ियाल उच्च शंख ध्वनि के बीच हुई। सर्व प्रथम अहंकार से होने वाली हानि को समझाने के लिए दर्शकों के समक्ष नारद मोह प्रसंग का अभिनय किया गया। पुराने आईटीआई मैदान के भव्य मंच पर हाे रही रामलीला देखने के लिए भारी संख्या में दर्शक पहुंचे। इस मौके बच्चों के लिए झूले आदि का भी प्रबंध किया गया था। इसी क्रम में गुरुवार को श्रीराम और माता सीता के जन्म की कथा का मंचन किया जाएगा।

नारद को साधना करते हुए देखकर इंद्र सिंहासन को लेकर शंकित हो गए। नारद की तपस्या भंग करने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन सब विफल हो गए। इससे नारद के मन में अहंकार गया है। मामला समझते ही विष्णु जी नारद के अहंकार को नष्ट करने के लिए विश्व मोहिनी केे स्वयंवर की रचना करते हैं, जिसमें नारद जी का अहंकार चकनाचूर हो जाता है। वे आकुलता में अपने अाराध्य विष्णु को ही श्राप देते हैं, भगवान उन्हें समझाते हैं कि भक्त को अहंकार के संताप में जलने से बचाने के लिए ही जतन करना पड़ता है।

इसके पूर्व श्रीराम लीला उत्सव कमेटी ने पुराने आईटीआई मैदान तथा श्रीरामलीला कमेटी पटेल नगर लेबर चौक गांधी कैंप में भगवान गणेश की पूजन के साथ रामलीला की शुरुआत हुई। इस मौके पर गणेश वंदना की गई, जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान आमंत्रित अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।