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एडीसी कार्यालय ने झाड़ा पल्ला, निगम का मामला बताकर फाइल वापस भेजी चंडीगढ़
बोहरगांव में बीपीएल के प्लाटों को लेकर हुए गड़बड़झाले की फाइल एडीसी कार्यालय ने अपना पल्ला झाड़ लिया है। पंचायती राज विभाग के डिप्टी सीईओ ने फाइल यह कहकर चंडीगढ़ भेजी दी है कि बोहर गांव का पूरा रिकार्ड 2010 के बाद नगर निगम रोहतक के पास जमा है। ऐसे में मामले की जांच निगम प्रशासन ही करे। उधर, मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए बोहर गांव की आधा दर्जन महिलाएं भाजपा नेत्री मीनाक्षी नांदल के नेतृत्व में डीसी शेखर विद्यार्थी से मिली और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। डीसी ने उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।
बोहर गांव के युवक प्रदीप कुमार ने डीसी को शिकायत दी कि 2009 में बीपीएल गरीब परिवारों के लिए प्रदेश सरकार ने 100-100 गज के प्लाट आबंटित किए थे। योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले व्यक्ति को ही प्लाट मिल सकता है, लेकिन फर्जीवाड़ा करके ऐसे में लोगों को भी प्लाट दे दिए गए, जो केवल सरकारी नौकरी करते हैं, बल्कि लाखों रुपए के लाइसेंसी हथियार तक ले रखे हैं। आरटीआई के तहत नगर निगम, डीसी कार्यालय पुलिस प्रशासन से मांगी गई सूचना से यह खुलासा हुआ है।
अब निगम के अधिकारी देंगे अदालत में जवाब
उधर,मामले को लेकर जिला अदालत में पहले से केस चल रहा है, जिसमें पहले पंचायती राज विभाग के अधिकारी जवाब देने जाते थे, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों को कोर्ट के अंदर प्लाटों के आबंटन को लेकर जवाब देना होगा।
रोहतक. बोहरगांव में भाजपा नेत्री मीनाक्षी नांदल को मांग पत्र देते हुए वाल्मीकि समुदाय की महिलाएं।