छह लाख में पड़ा अधिकारियों का फैसला
डेढ़दशक पहले शहर की सड़कों को चौड़ी करने के लिए झज्जर चुंगी पर आठ दुकानें तोड़ने का फैसला नगर निगम को भारी पड़ गया। सुप्रीम कोर्ट में निगम की याचिका खारिज होने पर अब केवल निगम आठ दुकानों दोबारा बनाकर देगा, बल्कि 4 हजार रुपए प्रति दुकान किराया पीड़ित दुकानदारों को देगा। इस पर करीब छह लाख की लागत आएगी। फैसले के बाद निगम ने चुंगी के ऊपर दुकानों बनाने शुरू कर दी हैं, जिनका अस्सी प्रतिशत काम पूरा भी हो गया है।
साल 2002 में नगर परिषद ने शहर की झज्जर चुंगी निवासी जयप्रकाश महाबीर प्रसाद की आठ दुकानों को चौड़ा करने के नाम पर तोड़ दिया। पीड़ित दुकानदारों ने तत्कालीन डीसी नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी को पार्टी बनाकर जिला अदालत में याचिका दायर की। 2005 में सिविल जज नरेंद्र शर्मा की अदालत ने पीड़ित दुकानदारों के पक्ष में फैसला देते हुए नगर परिषद प्रशासन को आदेश दिए कि दोबारा से दुकानें बनाई जाएं। साथ में चार हजार रुपए प्रति दुकान किराया दिया जाए। परिषद की ओर से हाईकोर्ट में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। परिषद सुप्रीम कोर्ट में चली गई, लेकिन अब शीर्ष कोर्ट ने भी निगम की याचिका को खारिज कर दिया।
मीटिंग में उठ चुका मामला
14नवंबर को निगम की मीटिंग में भाजपा पार्षद ने इस मुद्दे को उठाया, लेकिन निगम अधिकारियों ने साफ किया कि तत्कालीन अधिकारियों ने यह फैसला अपने व्यक्तिगत हित के लिए नहीं लिया था। ऐसे में उनसे रिकवरी का कोई औचित्य नहीं है।
अधिकारियों से वसूली जाए लागत राशि
भाजपापार्षद अशोक खुराना ने निगम प्रशासन से मांग की है कि तत्कालीन डीसी कार्यकारी अधिकारी ने दुकानें तोड़ने का फैसला लिया था। अब खामियाजा निगम प्रशासन को भुगतना पड़ रहा है। लागत राशि जिम्मेदारी अधिकारियों से वसूली जाए।
>खुद दुकान बनाकर देगा नगर निगम, साथ में चार हजार रुपए प्रति दुकान किराया भी
>भाजपा पार्षद ने उठाए सवाल, अधिकारियों से क्यों वसूली जाए लागत राशि
रोहतक. झज्जरचुंगी पर नगर निगम द्वारा बनाकर दी गई आठ दुकानें।
पार्षद अशोक खुराना