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दिल के नहीं, अपनों के दर्द ने तोड़ा दिल

7 वर्ष पहले
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झज्जरजिले के गांव चमनपुरा के थानेदार सतबीर सिंह की बदकिस्मती उनका साथ नहीं छोड़ रही। एक तो ऊपर वाले की मेहर नहीं रही, दूसरा नीचे वालों ने भी कदम दर कदम धोखा दिया। बड़े अरमानों से बेटी सरिता की शादी की, लेकिन बीमारी के चलते पति का देहांत हो गया। दूसरी शादी की तो ससुराल वालों ने बेटी को घर से बेघर कर दिया। न्याय मांगा तो उल्टा उसे ही थाने के चक्कर काटने पड़े। न्याय देने की जगह रिश्वत मांगी जाने लगी। अब तो कानून न्यायपालिका की उसके उसके परिवार के साथ न्याय करेगी। विजिलेंस थाने में दैनिक भास्कर संवाददाता से खास बातचीत में सतबीर ने अपने दिल का दर्द यूं बयां किया।

सतबीर ने बताया कि वह हार्ट अटैक का मरीज है। बेटी सरिता के भविष्य की चिंता से वह उभर नहीं पा रहा है। उसने 2008 में बेटी सरिता की शादी भिवानी जिले में दादरी के नजदीक गांव बधवाना निवासी महेश के साथ की, जो सेना में कार्यरत था, लेकिन ब्लड कैंसर के चलते महेश की मौत हो गई। बेटी घर रहने लगी। अच्छे भविष्य की कामना कर एमडीयू में दाखिला दिलवा दिया। बेटी को एससी-एसटी एक्ट के तहत 2009-10 में 18 हजार रुपए वजीफा मिला। बेटी ने पढ़ाई पूरी की, सोचा अकेली जिंदगी का सफर कैसे काटेगी, यह सोचकर 2011 में दिल्ली निवासी सतीश से शादी कर दी। शादी के बाद सतीश ने बेटी को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। 2013 में सतीश के खिलाफ झज्जर महिला सेल सदर थाने में दहेज उत्पीड़न की शिकायत दी।

सतबीर ने डीसी को दी शिकायत : सतबीरने बताया कि दहेज उत्पीड़न की शिकायत का बदला लेने के लिए सतीश ने डीसी रोहतक को शिकायत दे दी कि सरिता ने फर्जी तरीके से 18 हजार रुपए वजीफा लिया है। डीसी कार्यालय से पीजीआई थाने में जांच के लिए फाइल भेजी गई। अपने ही विभाग के पुलिस अधिकारी उसे न्याय देने की जगह चक्कर कटवाने लगे। आखिर में धमकी दी कि अगर रिश्वत नहीं दी, तो केस दर्ज हो जाएगा। रिश्वत मांगने वाले सब इंस्पेक्टर को विजिलेंस ने गिरफ्तार कर लिया है। अब जांच टीम न्यायपालिका ही उसके साथ न्याय करेगी।

एमडीयूने माना सही, कोई कागजात तो देखे : पीड़ितथानेदार का कहना है कि उसने विजिलेंस से रिकार्ड निकलवाया, जहां स्पष्ट किया गया है कि सरिता को जो वजीफा मिला है, वह उसकी हकदार थी। उसने विवि के कागजात तक जांच अधिकारी को दिखाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उल्टा केस में फंसाने की धमकी दी