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कण-कण में भगवान का स्वरूप : श्रीिहत

7 वर्ष पहले
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ग्रीन रोड स्थित सोहम मंदिर में दिव्य श्रीमद् भक्तमाल कथा

श्रीहित अंबरीश ने कहा कि अध्यात्म जगत की ज्ञान और भक्ति दो धाराएं हैं। दोनों का लक्ष्य प्रभु की कृपा पात्र बनना ही है, लेकिन ज्ञान मार्ग में भटकने की पूरी गुंजाइश रहती है, जबकि भक्त पूरी तौर पर भगवान पर ही निर्भर होता है। हर हाल में खुश रहकर वह भजन में लीन होता है। वे ग्रीन रोड स्थित सोहम मंदिर में चल रहे दिव्य श्रीमद् भक्तमाल कथा कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि भक्तों की दुनिया निराली होती है। वे लोभ लालच से परे होते हैं। भौतिकता के प्रति कभी उनका अनुराग नहीं रहता है। दुनिया की नजरों से खुद को छुपाकर वे हर जरूरतमंदों की सेवा करते रहते हैं। प्रभु की कृपा से भक्त को कण कण में उस परम सत्ता के दर्शन होते हैं, जिसने इस समूचे ब्रह्मांड को रचा है। ज्ञान मार्ग ईश्वर को तर्क की कसौटी से समझने की कोशिश करता है। यह लंबा और सावधानीपूर्वक चलने वाला रास्ता है।

उन्होंने कहा कि वृंदावन श्रीकृष्ण भगवान की लीला भूमि है। जहां हर पल भक्ति की रसधार बहती रहती है। जिसने भी एक बार वृंदावन की तपोभूमि को माथे पर चढ़ाया उसके जीवन का संताप मिट जाता है। आज मानव खुद के द्वारा बनाए जंजाल में उलझ कर परेशान हो रहा है। उसे इस चक्रव्यूह से बाहर निकलने के सारे रास्ते बंद नजर आने लगे हैं। जिस भौतिकता ने उसको सबसे पहले लुभाया और अपने आकर्षण में पथ भ्रष्ट किया, उसकी साजिश तब समझ से परे थी, लेकिन आज सच्चाई सामने है। वर्तमान और भविष्य के कल्याण के लिए ऋषियों के बताए रास्ते पर चलना होगा। उनके द्वारा दिए गए संस्कार और आचरण से ही आज की मानवता का भला हो सकता है अन्यथा ऐसे ही अशांति के वातावरण में जलना पड़ेगा।

रोहतक. ग्रीनरोड स्थित सोहम मंदिर में आयोजित श्रीमदभागवत कथा के दौरान प्रवचन श्री हित अंबरीश मौजूद श्रद्धालु।