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पीजीआई में मरीजों को मिला सुकून, नए ने खुद को माना खुशकिस्मत

7 वर्ष पहले
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सातदिन और 13 मौत। 13 साल की अंकिता की मौत से आवेशित पिता की एक गलत हरकत से बेकाबू हुए डॉक्टर हड़ताल पर क्या गए मानो मरीजों की उम्मीद ओझल हो गई।

दर्द से कराहते मरीजों ने जैसे तैसे 7 दिन काटे। परिजन परेशान थे और लाचार भी। लेकिन कर भी क्या सकते थे। ऐसे में रेजीडेंट डॉक्टरों में संवेदना जागी और हड़ताल की हठ छोड़ दी। शुक्रवार से ओपीडी संभालते हुए मरीजों की देखरेख में जुट गए। प्रशासन ने भी डॉक्टरों की मांग पर अमल करते हुए आरोपी पर कार्रवाई की और मामले को खत्म किया। गुरुवार को जैसे ही हड़ताल खत्म होने की भनक मरीज और उनके परिजनों को लगी तो मानो मृत हो रही उम्मीद फिर जीवित हो उठी, पीजीआई में एक बार फिर व्यवस्था पटरी पर गई। डॉक्टरों में एक नया जोश दिखा।

मरीजपरिजन बाेले : फतेहाबादनिवासी अमरीक सिंह का दो माह से इलाज चल रहा है।

उनके पेट का ऑपरेशन हुआ है। हड़ताल टूटने पर अमरीक ने खुशी जताई। कहा कि 7 दिन बड़ी तकलीफ में बिताने पड़े। अब जल्दी ठीक होने की उम्मीद है।

मदीना सोनीपत निवासी किशन अपने भाई चंदर को लेकर दोपहर 1 बजे पीजीआई आए। प्राथमिक उपचार के बाद उसे भर्ती कर लिया गया। किशन ने कहा कि भगवान का शुक्र है कि हड़ताल खत्म हो गई, नहीं तो हम प्राइवेट इलाज नहीं करा पाते।

बदला-बदला सा नजारा

इसबीचपीजाआई में नजारा बदला बदला सा दिखा रहा। हुआ यूं कि अक्सर डॉक्टरों की संख्या मरीजों की अपेक्षा बेहद कम होती थी। लेकिन शुक्रवार को वार्डों में गिने चुने मरीज ही दिखे और डॉक्टरों की संख्या ज्यादा रही। हालात ये थे कि मरीज ढूढे नहीं मिल रहे थे। जो पहले से भर्ती है उनका हालचाल जानने के लिए दिनभर डॉक्टरों में गर्मजोशी दिखाई दी। इमरजेंसी में मरीजों का आना शुरू हो गया। सामान्य दिनों की अपेक्षा भीड़ कम होने के कारण मरीजों की वनस्पति डॉक्टरों की तादात ज्यादा रही। डॉक्टरों ने सुबह शाम के रूटीन राउंड के अलावा कई-कई बार वार्डों में मरीजों के स्वास्थ्य का जायजा लिया।

हड़ताल खत्म होने के बाद शुक्रवार को मरीज का इलाज करते डॉक्टर।