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चार पहर तुम सोय गंवाये अब प्रभु के गुण गावो : दूलम दास

6 वर्ष पहले
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“प्रभातसमय प्रभु गुण गावो निंदरा दूर हटाओ, चार पहर तुम सोय गंवाये अब प्रभु के गुण गावो’ को संत दूलम दास जी भीष्म जीवन में सफलता का मूलमंत्र मानते थे। सत्संग में दिनचर्या पर ज्यादा जोर देते। अक्सर कहा करते कि अलसुबह उठने वाले व्यक्ति के जीवन में दुख की गुंजाइश नहीं होती है। उसको भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की उपलब्धियां सरलता से मिलती हैं। यह उद्गार श्री डेरा महाराज दलेदास भीष्म जी माड़ौधी रांगड़ान के महंत सूरजभान के हैं। वे संत दूलमदास जी भीष्म के अवतरण एवं निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में वीरवार को बड़ी नवमी पर आयोजित कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर गुरुवार को साध संगत को संबोधित कर रहे थे। बाबा दूलम दास गृहस्थ जीवन में रहते हुए आध्यात्मिक चिंतन मनन करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करते थे। निष्ठापूर्वक अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने वालों को शाबाशी देते। वह सत्कर्म को अध्यात्म की पहली सीढ़ी मानते थे। इस दौरान महंत ने व्यावहारिक जगत में विनम्र रहने की सलाह देते हुए कहा है कि विनम्रता से सफलता का पथ बाधाहीन हो जाता है। धीरे-धीरे सद्गुण मनुष्य के पास पहुंचने लगते हैं और आध्यात्मिक क्षेत्र में उसकी उन्नति होने लगती है। भोग विलास में डूबे लोगों का जीवन चरखे की तरह बताते हुए उन्होंने कहा कि कनक कामिनी संग में कदै आवै धाप/ रात दिना झुर झुर मरै सहता तीनों संताप।

अखंड सत्संग, नि:शुल्क चिकित्सा शिविर भी

संतदूलमदास जी भीष्म के अवतरण निर्वाण दिवस के उलक्ष्य में 13 फरवरी को श्री डेरा महाराज दलेदास भीष्म जी माड़ौधी रांगड़ान में अखंड सत्संग, नि:शुल्क चिकित्सा शिविर एवं भंडारे का आयोजन सुबह आठ बजे से शुरू होगा। होम्योपैथी जेआर किसान कॉलेज एवं हॉस्पिटल के डॉक्टरों की टीम डेरा पर आने वाले श्रद्धालुओं का स्वास्थ्य परीक्षण करने के साथ ही नि:शुल्क दवाओं का वितरण करेगी।

बाबा दूलम दास।

माढौदी रांगडान में बना बाबा दूलम दास डेरा।