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कंप्यूटर टीचर का शिक्षा सदन के बाहर आत्मदाह का प्रयास
26दिन से शिक्षा सदन के बाहर धरने पर बैठे कंप्यूटर टीचर गुरुवार को उग्र हो गए। धरने में शामिल रोहतक के उमेश कुमार ने मिट्टी का तेल छिड़क कर आत्मदाह की कोशिश की। पुलिस ने उसकी कोशिश तो नाकाम कर दी, लेकिन उसके बाद पुलिस और अन्य कंप्यूटर टीचरों में जमकर झड़प हुई। नौबत यहां तक गई कि पुलिस कर्मियों ने महिला कंप्यूटर टीचरों को भी नहीं बख्शा।
बात तब बिगड़ी जब पुलिस ने धरने पर बेहोश हुए यमुनानगर निवासी राजीव को एसएचओ की गाड़ी में अस्पताल ले जाने की कोशिश की। साथी कंप्यूटर टीचरों ने पुलिस को रोकने की कोशिश की। इसी के चलते यहां करीब 45 मिनिट तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प हुई। पुलिस ने जबरन राजीव को गाड़ी में डाल लिया और जिन लोगों ने गाड़ी को रोकने की कोशिश की, उन्हें भी वहां से खदेड़ा गया।
13 फरवरी को शिक्षा विभाग के वित्त आयुक्त टीसी गुप्ता उन प्राइवेट कंपनियों पर कार्रवाई करने के बारे में फैसला ले सकते हैं, जिनके माध्यम से कंप्यूटर टीचरों की भर्ती हुई। कंप्यूटर टीचरों का आरोप है कि इन कंपनियों ने उनका शोषण किया। तो पूरा वेतन दिया और नियुक्ति की एवज में भी वसूली की गई।
समायोजन के चांस कम
शिक्षाविभाग के वित्त आयुक्त टीसी गुप्ता पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि इन कंप्यूटर टीचरों को सरकारी सेवा में समायोजित नहीं किया जा सकता। शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा भी कह चुके हैं कि टीचरों का सरकार की तरफ बकाया नहीं है बल्कि कंपनियों की तरफ है।
स्कूलों का बहिष्कार जारी
पिछले25 दिन से सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा बंद पड़ी है। प्रदेश में 16,000 सरकारी स्कूल हैं। बहुत से कंप्यूटर टीचरों को समायोजित किया जा चुका है जबकि करीब 2,800 कंप्यूटर टीचर समायोजन की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। उनका कहना है कि कंपनियों के साथ किसी भी तरह का समझौता मंजूर नहीं होगा।
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