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परिस्थितियों से लड़कर संभाली बड़ी जिम्मेदारी
भारतके महान अभियंता एवं भारत र| मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्मदिन 15 सितंबर को इंजीनियर्स डे के रूप में मनाया जाता है। उनके पास पैसा होने पर भी उन्होंने ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई जारी रखी।
परिणास्वरूप वह आज भी देशभर के इंजीनियर्स के लिए प्रेरणा हैं। इस दिन पर हम शहर के कुछ इंजीनियर्स के अनुभव साझा कर रहे हैं कि कैसे उन्होंने सफलता हासिल की और आज वह अपने कार्यों से कितने संतुष्ट हैं।
अकसर सुर्खियों से दूर रहने वाले इंजीनियर्स ने संघर्ष के बाद मिली कामयाबी की दास्तां बताई तो अंदर की बात भी उनकी जुबां पर गई। हालात कुछ भी रहे, लेकिन कभी परिस्थितियों से समझौता नहीं किया।
युवाओं के लिए संदेश
उनकीअपील है कि यदि इंजीनियरिंग करना चाहते हैं तो किसी अच्छे कॉलेज से तकनीकी कोर्स करें और पूरी लगन लक्ष्य बनाकर मेहनत करें, तभी सफलता मिलेगी।
इंजीनियरिंग के बदले पढ़ाया ट्यूशन
गोहानाके मध्यमवर्गीय परिवार से होने के बावजूद हरीश जुनेजा ने कभी परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी और पढ़ाई जारी रखी और आज वह पब्लिक हेल्थ डिवीजन के सीवरेज शाखा में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर की पद पर कार्यरत हैं। जुनेजा बताते हैं कि एक समय जीवन में एेसा भी आया, जब उनके पास डिप्लोमा की फीस भरने के लिए पैसे तक नहीं थे। प्रिंसिपल ने पढ़ाई के प्रति उनकी लगन को देखते हुए कहा कि मैं तुमको पढ़ाऊंगा और तुम मेरे बच्चों को ट्यूशन देना। फिर क्या था, हरीश जुनेजा ने पूरी लगन और मेहनत से उनके बच्चों को पढ़ाया और खुद भी पूरी लगन से पढ़ते रहे। जिन बच्चों को उन्होंने पढ़ाया आज वो भी इंजीनियर बनकर अच्छे पदों पर कार्यरत हैं।
कोशिश,लोगों तक साफ पानी पहुंचाने की
34सालों की नौकरी में जुनेजा ने हमेशा बेहतर करने की कोशिश की और इसमें काफी हद तक कामयाब भी रहे। हमेशा यह सपना रहा कि वह गांवों ढाणी में रहने वालों तक पीने का साफ पानी पहुंचे। उनके ऐसे और कई सपने थे, जिन्हें उन्होंने इस पद पर रहते हुए पूरा किया।
सपने को बनाया हकीकत
बिजलीनिगम में अधीक्षक अभियंता के पद पर तैनात वीएस मान का सपना बचपन से ही तकनीकी क्षेत्र में जाने का था। सपनों को पंख देने के लिए इंजीनियरिंग क्षेत्र चुना। वीएस मान करनाल के गांव बालाह के रहने वाले हैं। कक्षा 5 तक की पढ़ाई यहीं से की। उनका कहना है कि टीचर पिता ने मार्गदर्शक की भूमिका निभाई