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दर्द से चीखते मरीज, अब लौटने लगे वापस

7 वर्ष पहले
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इंसानियत की खातिर गहने बेचकर भी कराऊंगी इलाज

मुंहबोले भाई के इलाज के लिए बहन कर रही दुआ, बोली

पीजीआईके वार्डों में सामान्य दिनों में जहां एक बेड पर दो से तीन मरीज भर्ती रहते हैं, आज वहीं गिनती के मरीज बचे हैं। बाकी बेड पर सन्नाटा पसरा है। समय से इलाज मिलने से पीजीआई में भर्ती एक दर्जन मरीजों की हालत बिगड़ती जा रही है। हड़ताल के छठे दिन बेबस परिजन बोले यहां दवा लिखने वाला कोई नहीं है। मरीजों की कभी भी जान जा सकती है। पीजीआई प्रशासन के प्रतिरोध के बावजूद दैनिक भास्कर ने इमरजेंसी से लेकर विभिन्न वार्डों में भर्ती मरीजों उनके परिजनों से मुलाकात की तो दिल दहलाने वाली कहानी सामने आई।

भाईसीरियस है, कहां जाएं

झज्जरके नयाबांस गांव निवासी पंकज 24 को छह दिन पहले पीजीआई में भर्ती कराया था। उसके सिर पीठ में गंभीर चोटें है। भाई राम निवास ने बताया कि हड़ताल के दिन से कोई डॉक्टर देखने नहीं आया। बुधवार की दोपहर नर्स ने अाकर जवाब दे दिया। इसकी हालत नाजुक है, कहीं और ले जाओ? पैसे नहीं हैं, हम किधर जाएं?

होशआते ही नोंचते हैं पट्टी

झज्जरके गांव मालियावास निवासी केदार सिंह 65 सड़क दुर्घटना में जख्मी हो गए। पीजीआई में उनका 20 सितंबर से इलाज चल रहा है। दिमाग में चोट होने की वजह से घटना के दिन से ही बेहाेश पड़े हैं। जब चेतना लौटती हैं तो सिर पर बंधी पट्टी, ड्रिप नोचकर फेंकने लगते हैं। प|ी भगवती ने कहा 6 दिन पहले लिखी दवाएं खिलाकर दिन काट रहे हैं।

गुमचोट ने छीना चैन

रोहतकके डोभ गांव निवासी रामफल 70 को 19 तारीख को 11:30 बजे दिन में भर्ती कराया गया। बेटे राजेंद्र ने बताया कि फ़र्स्ट एड करने के बाद से कोई डॉक्टर देखने नहीं आया। छाती में गुम चोट है, जिसके दर्द से रात भर पापा नहीं सो पाते हैं। सुबह 10 बजे एक्स-रे लेकर आया हूं अभी तक उसको देखने वाला कोई नहीं आया, कल सुबह तक कहीं और ले जाऊंगा।

2माह से भर्ती, जान को खतरा

अमरीकसिंह 35 टोहाना फतेहाबाद का निवासी है। दूसरे के झगड़े में बीच बचाव करने में किसी ने पेट में चाकू मार दी। दो महीने से पीजीअाई में भर्ती हैं। भाई हरदीप ने बताया कि ऑपरेशन के बाद इलाज ठीक चल रहा था। डॉक्टर रोज घाव के ऊपर का मल निकालकर पट्टी बदलते थे। हड़ताल के बाद डॉक्टर ही नहीं आए, मल नहीं निकलने से हालत खराब हो रही है।

नर्सबोली, घर ले जाओ

कालू