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डेढ़ साल से तरीख पर तारीख, अब बहस 13 जनवरी को

7 वर्ष पहले
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रोहतक. करौंथा के सतलोक आश्रम के कथित संत रामपाल पर अब कानून का शिकंजा कस चुका है, लेकिन बरवाला कांड से पहले उनके खिलाफ जांच बेहद धीमी गति से चलती रही।
आश्रम को कुर्क करने की याचिका पर स्थानीय एसडीएम कोर्ट में डेढ़ साल से 18 तारीख लगाई, लेकिन थाना प्रभारी की रिपोर्ट पर बहस शुरू नहीं हो सकी। अब मंगलवार को बहस के लिए 13 जनवरी की तारीख तय की गई। एडवोकेट नरेंद्र सिंह कटारिया ने बताया कि करौंथा निवासी कमला देवी ने अप्रैल 2013 में एसडीएम कोर्ट में याचिका दायर की कि रामपाल के ट्रस्ट बंदी छोड़ भक्ति मुक्ति ने गलत तरीके से ली जमीन पर सतलोक आश्रम बनाया है, जिसका केस जिला अदालत में चल रहा है।

ऐसे में आश्रम को सीआरपीसी की धारा 145 के तहत कब्जे में लिया जाए। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश सरकार व आर्य प्रतिनिधि सभा की याचिका खारिज होने के बाद 18 फरवरी 2013 को प्रशासन ने संत रामपाल के ट्रस्ट को आश्रम सौंप दिया था। कमला की याचिका पर सदर थाना प्रभारी ने आश्रम को आर्य समाजियों व रामपाल समर्थकों के बीच तनाव को देखते हुए आश्रम को दोबारा सीआरपीसी की धारा 145 के तहत कुर्क करने की सिफारिश की।

एसडीएम कोर्ट ने दूसरे पक्ष को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस दिया और 23 मई 2013 को बहस की तारीख तय की गई, लेकिन इसके बाद एसडीएम कोर्ट में 18 तारीख लग चुकी हैं, लेकिन अभी तक बहस नहीं हो सकी है।

हालांकि जुलाई माह में करौंंथा आश्रम को लेकर हुई हिंसा में महिला सहित तीन लोग मारे गए। हिंसा के चलते एसडीएम कोर्ट में आश्रम को कुर्क करने की याचिका पर सुनवाई की प्रक्रिया प्रभावित चल रही है।