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अंतिम तिथि के तीन दिन बाद पहुंचाया आवेदन, जुर्माना वसूला

7 वर्ष पहले
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रोहतक। हरियाणा सिविल सर्विस के लिए आवेदन किया था। बाकायदा डाकघर से स्पीड पोस्ट की। लापरवाही का आलम देखिए, विभाग ने आवेदन अंतिम तिथि बीतने के तीन दिन बाद पहुंचाया। फार्म रद्द होने की जानकारी मिली तो सारे सपने धरे के धरे रह गए। डाक विभाग के अधिकारियों से शिकायत की तो उन्होंने स्पीड पोस्ट में लगी राशि लौटाकर टरकाने की कोशिश की। मामला भविष्य के साथ खिलवाड़ का था, इसलिए डाक विभाग के सबक सिखाने की ठान ली। अदालत का सहारा लेकर डाक विभाग से जुर्माना वसूला और मानसिक प्रताड़ना का मुआवजा भी।

व्यवस्था के साथ जंग लड़ी शहर की ओल्ड हाउसिंग बोर्ड निवासी डॉ. हर्ष कुलश्रेष्ठ और उनकी पत्नी श्रुति ने। दोनों ने 24 दिसंबर 2011 को झज्जर रोड स्थित डाक घर से स्पीड पोस्ट के जरिये एचसीएस की परीक्षा के लिए आवेदन किया। बाकायदा 25 रुपए की रसीद शुल्क अदा किया था, लेकिन आवेदन फॉर्म निर्धारित अंतिम तिथि से तीन दिन बाद(27 की बजाय 29 दिसंबर को)पहुंचा। निर्धारित अवधि में न पहुंचने के कारण आवेदन निरस्त कर दिया गया। पता चलने पर दंपति ने डाक विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया।
25 रुपए देकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकते
डाक विभाग की चोरी और सीनाजोरी की कार्यशैली सामने आने के बाद डॉ.कुलश्रेष्ठ ने 18 दिसंबर 2013 को उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फोरम ने माना कि स्पीड पोस्ट के देरी में पहुंचने से डॉ.कुलश्रेष्ठ और उनकी पत्नी एचसीएस परीक्षा से वंचित रह गई, जिसके चलते दोनों को मानसिक उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा। महज 25 रुपए की राहत राशि देकर डाक विभाग जवाबदेही से मुक्त नहीं हो सकता। फोरम ने अपील की तिथि से फैसले की तिथि तक 9 फीसदी ब्याज के साथ पति-पत्नी को दस-दस हजार रुपए का भुगतान करने के आदेश दिए। निर्धारित समय में भुगतान न करने की स्थिति में 3 प्रतिशत ब्याज दर बढ़ाते हुए राशि देने के आदेश दिए।