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दशरथ ने त्यागे प्राण, लक्ष्मण सीता सहित राम गए वनवास
श्रीरामको राजा बनाए जाने की घोषणा होते ही अयोध्यावासियों की खुशियों ठिकाना नहीं रहा, लेकिन काल चक्र को कुछ और ही मंजूर था। राम के राज्याभिषेक की पूर्व संध्या पर कैकेयी की करतूत से परिस्थितियां बदल गईं। सिंहासन पर बैठने वाले राम को सीता लक्ष्मण के साथ वन को प्रस्थान करना पड़ा, जबकि राजा दशरथ इस आघात को सहन नहीं कर सके।
बेटे राम के वियोग में उन्होंने प्राण त्याग दिए। शहर में चल रही रामलीला में शनिवार को हुए मंचन की यही पटकथा रही। सीता स्वयंवर की खुशी में शामिल रहे दर्शक भी श्रीराम काे वनवासी वेष में देखकर भावुक हाे गए। किसी ने दशरथ को सराहा तो बहुत लोगों ने कैकेयी की आलोचना की। राम वन गमन के दृश्य के साथ तीसरे दिन की रामलीला का समापन हुआ। पुराने बस स्टैंड स्थित प्राचीन लोकल रामलीला, पुराने आईटीआई मैदान पर चल रही श्रीराम उत्सव कमेटी द्वारा हो रही रामलीला में दर्शकों ने भागीदारी की और श्रीराम के आदर्श चरित्र से प्रेरणा ली।
रामलीला के दौरान मूिर्छत दशरथ को संभालते भगवान श्रीराम। पास में खड़ी कैकेयी।