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23 साल से कांग्रेस ने बत्तरा बिरादरी पर लगाया दांव

7 वर्ष पहले
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रोहतकशहर से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेसियों में टिकट को लेकर रार बढ़ती जा रही है। आए दिन टिकट के लिए नए समीकरण जोड़े जा रहे हैं। कांग्रेस की ओर से टिकट घोषित किए जाने के चलते मतभेदों के साथ पार्टी के टिकट दावेदारों ने अब अपने स्तर पर शक्ति प्रदर्शन और लोगों की राय लेनी शुरू कर दी है। इसका कारण रोहतक में 23 सालों से एक ही पंजाबियों की बत्तरा बिरादरी पर ही दांव लगाना है। एक ही बिरादरी को हर बार चुनाव में उतारे जाने से अन्य बिरादरियों में अभी से रोष भी पनप रहा है और टिकट की मांग भी बढऩे लगी है।

आकंड़ों पर नजर डालें तो विधानसभा चुनाव में 1991 में कांग्रेस से सुभाष बत्तरा पर दांव लगाया गया और जीत हासिल की। 96 में सुभाष बत्तरा 27 फीसदी वोट पाकर हार भी गए। कांग्रेस ने चेहरा बदला, लेकिन बत्तरा बिरादरी की टिकट दावेदारी को नजरअंदाज नहीं होने दिया। इसके बाद साल 2000 में शादी लाल बत्तरा को चुनाव मैदान में उतारा गया। 2005 में दोबारा से शादी लाल बत्तरा को ही चुनाव लड़ाकर जीत हासिल की गई। बाद में शादी लाल बत्तरा को राज्यसभा सदस्य बनाकर 2009 में भारत भूषण बत्तरा को मैदान में उतारा गया। अब टिकट के लिए उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।

आवेदकलेने लगे राय शुमारी

दूसरीओर कांग्रेस की रोहतक सीट के लिए आवेदन करने वाले तीन आवेदकों में से मात्र तीन ही आवेदक निवर्तमान विधायक भारत भूषण बत्तरा, गुलशन डंग और सतीश पंसारी टिकट की जंग में बचे हैं। मनमोहन गोयल भाजपा में कूद चुके हैं।

पैराशूटर वर्सेज ग्रॉसरूटर के एजेंडे पर जोर

शहरमें टिकट को लेकर अब पैराशूटर वर्सेज ग्रॉसरूटर का नया एजेंडा भी बनने लगा था। हर कोई आवेदक खुद को ग्रॉस रूटर यानी जमीन से जुड़ा हुआ नेता बताने लगा है। वहीं दूसरे को पैराशूटर बताकर विरोध किया जा रहा है। इसके अलावा कांग्रेस की ओर से पंजाबी वोटों को जोड़े रखने के लिए पंजाबी नेता की ही तलाश चल रही है। विरोध को देखते हुए भी अब कांग्रेस मुख्यालय में मंथन किया जा रहा है। इसी के साथ 23 सितंबर को कांग्रेस की सीटों की घोषणा होने की उम्मीद के चलते बहस तेज हो गई।