हरियाणा में पहली ब
विजिलेंस ब्यूरो को जल्दी मिलेगा मुखिया
आईपीएसलॉबी में चल रही जंग से एक और किस्सा याद आया। स्टेट विजिलेंस ब्यूरो में डीजीपी लगने की कोशिशें अभी भी जारी हैं। इसके लिए 1985 बैच के 2 और 1986 बैच के एक अफसर दौड़ में हैं। बिहार वाले आईपीएस अफसर ने जहां अभी तक हिम्मत नहीं हारी है। वहीं हरियाणा में रोहतक वाले आईपीएस भी पूरी जोर आजमाइश में लगे हैं। इनके बीच उत्तर प्रदेश वाले हाकिम भी मैदान में अंगद की तरह पैर जमाए हुए हैं। पिछली बार तो बिहार वाले हाकिम की पिछली कहानियां उन्हीं के कुछ साथियों ने काका त
हरियाणा में पहली बार सरकार क्या बनी, संघ और भाजपा के बड़े नेताओं ने कोने-कोने में अपने जासूस छोड़ दिए हैं। खट्टर काका के घर और दफ्तर से लेकर मंत्रियों और अफसरों तक के साथ कोई कोई आदमी लगाया हुआ है। हालात ये हैं कि एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट के एक ईटीओ को ओएसडी लगाए जाने के लिए संघ के बड़े अधिकारी ने सिफारिश की। खट्टर काका ने उसे अपने साथ लगाने के बजाय सीएमओ में बड़े अफसर के दफ्तर में लगा दिया। हालांकि इन ईटीओ साहब के बारे में किस्से आम हैं कि ये पिछली सरकार में भी एक ओएसडी और पूर्व मंत्री के खास हुआ करते थे। कुछ लोगों ने इनके कुछ और कारनामे खट्टर काका तक भी भिजवाए हैं, लेकिन कारनामे पहुंचाते-पहुंचाते हुजूर बहुत देर कर दी।
म्हारा सीएम सै घणा स्याणा
.....और अंत में
कोने-कोने में जासूस