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फाइनेंस कमेटी को पता नहीं अफसरों ने गुपचुप बनाया बजट

5 वर्ष पहले
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नगरनिगम में एक बार फिर अफसर और पार्षद आमने-सामने गए हैं। इस बार मुद्दा बना है निगम का प्रस्तावित बजट। पार्षदों की फाइनेंस कमेटी से बिना चर्चा और सलाह लिए ही अफसरों ने वित्तीय वर्ष 2016-17 का प्रस्तावित बजट बना दिया। इसमें कई मद बिल्कुल हवा-हवाई है। 19 फरवरी की निगम की बैठक के निमंत्रण के साथ बजट की काॅपी मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर सहित पार्षदों को भेजी गई है। इस कॉपी पर अधिकारियों के हस्ताक्षर भी नहीं हैं। इसे पार्षदों ने गैर जिम्मेदार रवैया करार दिया है। अपनी अनदेखी होने पर पार्षदों में आक्रोश व्याप्त है। पार्षदों का कहना है कि सदन की बैठक में यह मुद्दा जोरशोर से उठेगा। साथ ही कमेटी की अनदेखी पर अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा। इस पर विचार-विमर्श के लिए पार्षदों ने शनिवार को फाइनेंस कमेटी की बैठक भी बुलाई है।

बजटके लिए गठित है फाइनेंस कमेटी : फाइनेंसकमेटी मेयर रेणु डाबला की अध्यक्षता में बनाई गई है। इसमें सीनियर डिप्टी मेयर मंजू रानी हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक कुमार भाटी, पार्षद गुलशन ईशपुनियानी एवं राजबीर सैनी को सदस्य बनाया गया है। बजट का प्रारूप इस कमेटी की बैठक में चर्चा और सुझाव के आधार पर बनाया जाने का प्रावधान है, लेकिन पिछले वर्ष की तरह इस बार भी अधिकारियों की मनमानी चली और कमेटी को बिना सूचित किए ही प्रस्तावित बजट तैयार कर लिया गया।

निगम की जान आम बजट है, जिसकी बदौलत शहर में विकास कार्यों को अंजाम तक पहुंचाया जाता है। फाइनेंस कमेटी का गठन बेहतर बजट निर्माण में सहयोग करने के लिए किया गया है, लेकिन उनसे बिना पूछे कार्रवाई पूरी कर दी। -मंजू हुड्डा, सीनियर डिप्टी मेयर

बजटकब और कैसे तैयार किया गया इसकी जानकारी नहीं दी गई। 13 फरवरी को फाइनेंस कमेटी की बैठक कर रणनीति बनाई जाएगी। -अशोक भाटी, डिप्टी मेयर नगर निगम

जनप्रतिनिधि से पूछने की अधिकारियों ने जरूरत ही नहीं समझी और निगम का बजट तैयार कर लिया। इस गलत परंपरा के लिए अधिकारी जिम्मेदार हैं। बैठक में विरोध की स्थिति बन सकती है। -गुलशन ईशपुनियानी, पार्षद, वार्ड-12

आम बजट का स्वरूप विकास की दृष्टि से बेहद खास होता है। वर्ष भर की सारी गतिविधियां इसी के इर्द-गिर्द चलती हैं। फाइनेंस कमेटी का गठन इसी मकसद से किया गया था, लेकिन इस बार भी ऐसा नहीं हुआ। बिना कमेटी को जानकारी दिए बजट बना लिया गया। -रेणु डाबला, मेयर, नगर निगम

आंकड़ों में बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई आय

निगमने 2015-16 में टावर फीस, आरटीआई, टेंडर फार्म फीस, फायर एनओसी आदि आय की मद में 7 करोड़ रुपए की अनुमानित आय दिखाई, जबकि 8 माह में केवल सवा तीन करोड़ रुपए ही मिले। वर्ष 2016-17 में इस मद में 11 करोड़ रुपए की संभावित आय दिखाई जा रही है। ऐसे में यह टारगेट कैसे पूरा करेंगे, पता नहीं।

ऑफिस का इमरजेंसी खर्च बढ़ाया गरीबों के विकास में की कटौती

पार्षदोंके अनुसार, नए वित्तीय वर्ष के अनुमानित बजट में नगर निगम के अफसरों ने जमकर मनमर्जी चलाई है। स्लम बस्तियों के विकास मद को जहां घटाकर गत वर्ष की तुलना में आधे से भी कम कर दिया है, वहीं कार्यालय के आकस्मिक खर्च का बजट डेढ़ सौ फीसदी बढ़ाकर दर्शाया है।

2015-16 में जहां यह खर्च 4 करोड़ 92 लाख था, वहीं अगले वर्ष के लिए इसे 11 करोड़ 45 लाख रखा गया है। दूसरी ओर, स्लम डेवलपमेंट मद में बेहिसाब कटौती की गई है। वर्ष 2015-16 में इस मद का बजट 14 करोड़ 50 लाख रुपए था। अधिकारियों की लापरवाही के चलते इसमें केवल 2 करोड़ 74 लाख रुपए ही खर्च किए गए। इस बार इसे घटाकर महज 6 करोड़ 50 लाख रुपए कर दिया गया, जबकि इस क्षेत्र में मदद और विकास कार्यों की बड़ी चुनौतियां हैं।

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