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कैशलेस ट्रांजक्शन, ऐप और सुरक्षा मानकों की बारीकियां सीख रहे देश के 40 बैंक अधिकारी

5 वर्ष पहले
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नाबार्डकी प्रशिक्षण संस्था वर्ल्ड (बैंकर इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलेपमेंट) लखनऊ द्वारा आयोजित 3 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का सोमवार को शुभारंभ शहर के एक होटल में हुआ। उद्घाटन सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष डॉ. एमपी सिंह ने किया।

इस दौरान विभिन्न प्रांतों से ग्रामीण एवं सहकारी बैंकों के आए 40 अधिकारियों को रुपे कार्ड मैनेजमेंट, भीम एप्प, आधार संख्या पर आधारित पेमेंट (एईपीएस), इमीडियट पेमेंट सर्विस (आईएमपीएस), यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई), मोबाइल वैलेट, विभिन्न तरह के कार्ड जैसे कि डेबिट /क्रेडिट/ प्री पैड, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, माइक्रो एटीएम, पीओएस मशीनों के बारे में जानकारी दी जाएगी। साथ ही विभिन्न मोबाइल ऐप, उनमें रजिस्टर करने का तरीका एवं उनके सुरक्षा मानकों के बारे में भी कार्यशाला में बताया जाएगा। बता दें कि केंद्र सरकार कैश लेस ट्रांजेक्शन एवं डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित कर रही है। सरकार अप्रैल 2017 से किसानों को रुपे किसान कार्ड देना चाहती है ताकि किसान कैश की बजाय कार्ड से फसलों एवं खेती के लिए खरीदारी कर सकें और नकदी का प्रयोग कम से कम हो। इसी को दृष्टिगत रखते हुए नाबार्ड देशभर के ग्रामीण एवं सहकारी बैंकों को डिजिटल बैंकिंग एवं आगे किसानों को क्रेडिट कार्ड देने के लिए प्रोत्साहित एवं मार्गदर्शन कर रहा है।

इस अवसर पर नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक विजय राणा ने बताया प्रशिक्षण कार्यक्रम 3 दिनों का है, जिसमें पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरला एवं हरियाणा के ग्रामीण एवं सहकारी बैंकों के 40 अधिकारी भाग ले रहे हैं, कार्यक्रम के निदेशक वर्ल्ड लखनऊ से आए वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. मणि कुमार एवं डॉ. श्याम गर्ग हैं। डॉ. मणि कुमार ने बताया की देशभर में अभी तक विभिन्न जगहों पर 103 कार्यक्रम ग्रामीण एवं सहकारी बैंक के अधिकारियों के लिए कराए जा चुके हैं।

रोहतक. 3दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोलते नाबार्ड के जिला विकास प्रबन्धक विजय राणा।

प्रशिक्षण

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