सरकारी आदेशों की अनुपालना से घट सकता है कर्मचारियों का वेतन
एमडीयूमें ऑडिटर की कार्यप्रणाली को लेकर कर्मचारियों का विरोध बढ़ता जा रहा है, लेकिन सरकारी आदेशों की यदि ठीक से पालना की गई तो कई कर्मचारियों के वेतन में मिलने वाले फायदों पर भी आंच सकती है। यह खुलासा हुआ है, उच्चतर शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव की ओर से जारी किए गए आदेशों से। इन आदेशों पर यदि गौर किया जाए तो इनमें स्पष्ट तौर पर वेतन को रि-फिक्स करने की बात कही गई है, जबकि एमडीयू प्रबंधन लगातार इन नियमों की अवहेलना करते हुए उन पर आगे बढ़ता ही जा रहा है।
बुधवार को गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के पदाधिकारी एक बार फिर ऑडिटर के खिलाफ मोर्चा बंदी करते हुए कुलपति के पास पहुंचे और फिर से वेतन वृद्धि अटकाने अन्य मामलों की शिकायत की। इस पर कुलपति की ओर से उच्च अधिकारियों से बात कर समाधान का आश्वासन दिया। विवि के प्रशासनिक भवन के मुख्य द्वार पर गैर शिक्षक संघ प्रधान रणधीर कटारिया की अध्यक्षता में गेट मीटिंग की गई। इसमें कुलपति से हुई मांगों पर चर्चा हुई और गैर शिक्षक कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर कुलपति ने सैद्घांतिक तौर पर सहमति जताई और जल्द ही मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया। इस दौरान संघ उपप्रधान निरंजन, कोषाध्यक्ष कृष्ण चन्द्र, सह-सचिव प्रेम सजवान, प्रेस सचिव विजय पाल, फूल कुमार बोहत, सुमेर अहलावत, दर्शन पुनिया, धर्मेंद्र सहित कर्मचारी मौजूद रहे।
अटकी है वेतन री-फिक्सेशन
ऐसेमें वेतन का रि-फिक्स होना जरूरी है। सरकार के आदेश के मुताबिक कर्मचारियों को वेतन के साथ सभी संवैधानिक फायदे नहीं मिल पाएंगे। लेकिन इस 3600 ग्रेड पे में सभी संवैधानिक फायदे नहीं मिल सकेंगे, जोकि नियम के विरुद्ध है। एक सितंबर 2014 से सरकार ने वैसे ही 3200 ग्रेड पे को 3600 कर दिया है। अब वेतन की पिछली रि-फिक्सेशन अटकी है। ऐसे में मामला एमडीयू प्रबंधन केे चक्कर में अटका हुआ है।
ये हैं सरकारी आदेश और हालात
उच्चतरशिक्षा विभाग के प्रधान सचिव के 20 मार्च 2013 के पत्र के मुताबिक सहायक पद केे लिए 1 जनवरी 1986 से 1400-2600 जमा 60 रुपए स्पेशल पे और इसे बदलकर 5000-150-7850, एक जनवरी 1996 से और 9300-34800 के साथ 3200 ग्रेड पे के साथ एक जनवरी 2006 से दिया था। इसके अनुसार वेतन रि-फिक्स करनी थी, जोकि विवि ने नहीं की, लेकिन सिर्फ कुछ कर्मचारियों का ही वेतन रि-फिक्स किया गया। उसके बाद कुछ सेवानिवृत कर्मचारी और कुछ नौकरी पर कार्यरत कर्मचारी उच्च न्यायालय चले गए। जहां हाईकोर्ट ने 29 सितंबर 2014 के उच्चतर शिक्षा विभाग के महानिदेशक के पत्र के अनुसार अधिक पेमेंट की रिकवरी पर स्टे कर दिया और इसे आगे देने की कोई बात कोर्ट ने नहीं कही।